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ठाकुरजी का संगीत विद्यालय गुम हुआ, पुस्तकालय का पता नहीं

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वृंदावन (मथुरा)। विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी द्वारा वर्ष 1952 में स्थापित कुंजबिहारी संस्कृत पाठशाला, संगीत विद्यालय और पुस्तकालय का कोई भी अता-पता नहीं है। इसी के साथ प्राचीन सरकारी बांकेबिहारी प्राइमरी स्कूल भी लगभग गुमशुदा सा हो गया है।
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ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी महाराज के सेवायत एवं इतिहासकार आचार्य प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी के अनुसार वर्ष 1952 से 55 तक अस्तित्व में रही मंदिर की पांचवीं प्रबंध कमेटी ने श्रीकुंजबिहारी संस्कृत पाठशाला, संगीत विद्यालय और पुस्तकालय की स्थापना मंदिर परिसर में की थी। इस कार्य को विस्तार देते हुए पूर्व डिप्टी कलक्टर एवं छठी प्रबंध कमेटी (1955 से 58) के अध्यक्ष बाबूराम यादव तथा सदस्यगण गोस्वामी प्रियाशरण, रामशंकर, रोहणीचंद, रंगीले वल्लभ आदि के प्रयासों से सभी प्रकल्प फलीभूत हुए। गोस्वामी ने मांग की है कि सभी पुन: लोगों के लिए उपलब्ध होने चाहिए।
कमेटी द्वारा बनाए गए संस्कृत विद्यालय के प्रमुख नव्यव्याकरणाचार्य राधाबिहारी गोस्वामी, पुस्तकालय प्रभारी साहित्यकार/कवि छबीले वल्लभ गोस्वामी और संगीत विद्यालय के प्रधान संगीताचार्य नत्थीलाल सिंह ने संस्कृति की सेवा की। उसी बीच वर्ष 1957 में मंदिर प्रबंध कमेटी द्वारा श्रीस्वामीहरिदास अभिनंदन ग्रंथ प्रकाशित किया गया था। मंदिर द्वारा स्थापित संस्कृत-संगीत विद्यालयों से जहां अनेक जरूरतमंद विद्यार्थियों ने शिक्षा ग्रहण कर ख्याति प्राप्त की है, वहीं पुस्तकालय ने शोधार्थियों को साहित्यरस मिला। बाद के प्रबंधन की अरुचि के चलते ये सभी ऐतिहासिक धरोहरें अपना अस्तित्व ही खोती चलीं गईं और वर्तमान में इनका कहीं अता-पता ही नहीं है।
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कहां है पुराना साहित्य
वर्ष 1962 में पुस्तकालय प्रभारी छबीलेवल्लभ गोस्वामी के निधन के बाद मंदिर कमेटी ने उनके पुत्र ललित वल्लभ गोस्वामी से सारा साहित्य कमेटी में जमा कराने का आग्रह करके साहित्य मंगा लिया। जिसका अब पता नहीं है। तब से पुस्तकालय अतीत सरीखा हो गया है। इसी तरह बगैर किसी वजह के बेशकीमती बाध्य यंत्रों को संजोये रखने वाला संगीत विद्यालय भी बंद हो गया। अनेक संस्कृत विद्वानों की जनक कुंजबिहारी संस्कृत पाठशाला भी न जाने क्यों और कहां नदारद हो गई, कोई नहीं जानता। इनके अलावा सरकार द्वारा विद्यापीठ चौराहे के पास स्थापित बांकेबिहारी प्राइमरी पाठशाला भी अपने मूलस्थान से गायब है।
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