ब्रजमंडल के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के जन्म महोत्सव के लिए लड्डू गोपाल और श्रीराधाकृष्ण की कलात्मक मूर्तियों के निर्माण में कुशल कारीगर दिन-रात लगे हुए हैं। इस अवसर पर मूर्तियों की खूब बिक्री होती है। रामपुर, अलीगढ़ और मुरादाबाद में निर्मित होकर वृंदावन पहुंच रहीं लड्डू गोपाल और राधाकृष्ण की कलात्मक मूर्तियों का सौंदर्य वृंदावन के कारीगर अपनी कला से और बढ़ा रहे हैं। हस्तनिर्मित मूर्तियों का तो आकर्षण ही कुछ और है। रुपये की साख में आई गिरावट का असर मूर्ति बाजार पर भी साफ नजर आ रहा है। बीते वर्षों की तुलना में इस बार मूर्तियों पर महंगाई की मार अधिक है।
पीढ़ी दर पीढ़ी भगवान की मूर्ति के निर्माण में लगे हरिओम और सुभाष ने बताया कि पीतल के दाम 350 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। जो पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी अधिक हैं। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद से पीतल लाकर वृंदावन में हाथों से लड्डू गोपाल, भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियां तैयार करते हैं, एक मूर्ति को आकर्षण प्रदान करने में दो तीन दिन का समय लगता है। महंगाई के कारण हाथों से बनी मूर्ति लगभग एक हजार रुपये किलो या उससे अधिक में बिकती है। जबकि ढलाई वाली मूर्ति की कीमत इससे कुछ कम होती है।
गोपाल ने बताया कि हस्तनिर्मित मूर्तियों का आकर्षण दर्शनीय होता है। वहीं काले मेटल की मूर्तियां भी बाजारों में आ रहीं हैं। मूर्ति कारोबार से जुड़े कारीगर राधेश्याम ने बताया कि वृंदावन में हर वर्ष लगभग 20 करोड़ रुपये से अधिक का मूर्ति का कारोबार होता है।
हस्तनिर्मित मूर्तियों का विदेशों तक आकर्षण
दिन रात कड़ी मेहनत के बाद तैयार होने वाली भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पीतल की मूर्ति के साथ-साथ लड्डू गोपाल की मूर्ति भले ही कीमत में अधिक हो बावजूद इसके भारत की तुलना में विदेशी श्रद्धालुओं में हस्तनिर्मित मूर्तियों की मांग अधिक है। व्यापारी कपिल के अनुसार अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा और इंग्लैंड के मूल निवासी के साथ-साथ खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को हाथों से बनी मूर्तियां अधिक पसंद आती हैं। इन मूर्तियों में ढलाई की मूर्तियों की अपेक्षा कलात्मकता अधिक होती है।