मथुरा में इन दिनों होली का माहौल है। यहां लोग पर्व की तैयारियों पर व्यस्त हैं। साथ ही यहां के मंदिरों में होली की तैयारी जोरों पर चल रही है। यहां शुरू होने वाली पांच दिवसीय रंगों की होली के लिए कोलकाता से लगभग दो सौ किलो टेसू के फूल मंगाए गए हैं।
उत्तर प्रदेश की तीर्थनगरी मथुरा के होली विश्व में विख्यात हैं। यहां वृंदावन स्थित ब्रज के मंदिरों में होली की परंपरा अनूठी है। ब्रज के कई मंदिर ऐसे हैं, जहां होली पर फूलों से तैयार रंगों की बरसात होगी। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में होली आयोजन के लिए खास इंतजाम होंगे।
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इस बार ठाकुर बांकेबिहारी 200 किलो टेसू के फूलों से बना रंग भक्तों पर डालेंगे। वहीं फूलों की होली के लिए दो क्विंटल अलग-अलग फूल मंगाए गए हैं। यह केसर युक्त रंग और गुलाब जल की महक श्रद्धालुओं को आनंदित कर देगी। बांकेबिहारी सहित अन्य मंदिरों में तीन मार्च (रंगभरनी एकादशी) से होली महोत्सव का परंपरागत शुभारंभ होगा।
कोलकाता से मंगाए फूल
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में तीन मार्च से शुरू होने वाली पांच दिवसीय रंगों की होली के लिए कोलकाता से लगभग दो सौ किलो टेसू के फूल मंगाए गए हैं। इसके साथ गेंदा, मोंगरा, मारकेट गुलाब सहित करीब दो हजार किलो फूल मंगाए गए हैं। टेसू के रंग के साथ फूलों की पंखुड़ियों को पानी में उबालकर, इस पानी को छानकर ड्रम में भर दिया जाता है। इसमें चंदन, केसर, गुलाब जल को मिलाकर मंदिर के गोस्वामी स्वर्ण-रजत पिचकारियों से भक्तों पर रंग डालते हैं। इसके अलावा हाथरस से दो सौ किलो अबीर-गुलाल के साथ कुमकुम भी मंगाया गया है।
इन मंदिरों में होगा टेसू के फूलों के रंगों का प्रयोग
ठाकुर राधावल्लभ, राधास्नेह बिहारी, राधा दामोदर, राधाश्याम सुंदर, राधारमण मंदिर, राधा गोपीनाथ, मदन मोहन मंदिर आदि मंदिरों में टेसू के फूलों से बने रंगों का प्रयोग किया जाता है।
टेसू के फूलों को दो बड़ी कड़ाही में उबाला जाता है। इसके बाद छानकर दो ड्रमों में मंदिर भेजा दिया जाता है। टेसू के फूलों से बने होली के रंग तैयार कर रंग भरनी एकादशी पर भक्तों पर डाला जाता है। दो मार्च से प्राकृतिक रंग बनाए जाने का काम शुरू होगा। -ठाकुर महाराम सिंह, सुपरवाइजर हरगुलाल की हवेली मंदिर
इस दिन से होगा होली महोत्सव शुरू
रंगभरनी एकादशी पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज अपने निज महल से बाहर जगमोहन में आकर भक्तों के साथ होली खेलते हैं। इसी के साथ अन्य मंदिरों में टेसू के फूलों से ही होली खेली जाती है। -प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी, सेवायत ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर