सरकारी वकील ने न्यायाधीश से आग्रह किया कि हमलावरों ने गोलियां चलाकर वारदात को अंजाम दिया। इसे जघन्य मानते हुए दोषियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। परंतु अदालत ने सभी को आजीवन कारावास तथा प्रत्येक पर 23 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। एडीजीसी राजू सिंह ने बताया कि प्रधान पक्ष ने भी कालू ओर विशंभर पक्ष के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, परंतु अदालत ने उन्हें दोषी नहीं माना।
महेश और रामकिशन हत्याकांड में दोषियों को आजीवन कैद मिलने पर परिजनों ने खुशी जताई। कहा कि कानून के घर देर है अंधेर नहीं। उन्होंने न्यायालय का धन्यवाद किया। कहा कि आठ साल बाद ही सही उन्हें न्याय मिला है। फैसला आने के बाद पिता बहादुर सिंह ने कहा कि बेटों को खोने के बाद भी परिवार ने कई झूठे मुकदमे झेले। आज भी वो केस चल रहे हैं, हमें निराश नहीं हुए।
ईश्वर की अदृश्य शक्ति ने कभी मनोबल नहीं टूटने दिया। कानून पर पूरा भरोसा रखा और आज न्याय मिल गया। मां रनवीरी देवी ने भावुक होते हुए कहा कि कानून ने अपना काम किया है। फैसले ने दिल को थोड़ी तसल्ली जरूर दी है, लेकिन घाव अभी भी पूरी तरह भरे नहीं हैं। पत्नी सुमन देवी ने कहा कि पति और देवर के हत्यारों को फांसी की सजा होनी चाहिए थी, फिर भी इस फैसले से भी काफी संतोष मिला है।
दो सगे भाइयों की हत्याकांड के लगभग 6 महीने बाद ही पंचायत चुनाव हुए थे। इस चुनाव में ग्रामीणों ने रामकिशन की पत्नी सुमन देवी को ग्राम प्रधान के रूप में चुना और उन्होंने पांच साल तक दायित्व संभाला।
अभी लंबित हैं दो केस
इस मामले में दोनों पक्षों के बीच तीन केस चल रहे थे। इनमें से एक पर बुधवार को फैसला हो गया, लेकिन अभी भी दो केस लंबित हैं।