मथुरा। बुधवार को गवाही न देने पर जेल भेजे गए कन्नौज के एसीएमओ ने गुरुवार को कोर्ट में गवाही दे दी। गवाही के बाद चिकित्सक की प्रार्थना पर एनबीडब्लू वारंट को कोर्ट ने मंजूर कर लिया। कोर्ट ने एसीएमओ को जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं।
मामला 2014 का सींगू पट्टी मगोर्रा मेें जानलेवा हमले का था। इस मामले में तत्कालीन सरकारी चिकित्सक डॉ. ब्रह्मदेव ने चिकित्सकीय परीक्षण किया था। यह मामला हाईकोर्ट तक गया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि इस मामले की शीघ्र सुनवाई की जाए। एडीजे चतुर्थ अमर पाल सिंह की अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी।
केस सिर्फ चिकित्सक की गवाही पर ही अटका हुआ था। गवाह बने चिकित्सक की वर्तमान में कन्नौज में एसीएमओ के पद पर तैनाती बताई जाती है लेकिन चिकित्सक द्वारा कोर्ट के तमाम आदेशों को चकमा दिया जाता रहा और वह गवाही से बचते रहे। यहां तक कि पता भी बदल लिया। इसके चलते न्यायालय ने चिकित्सक के खिलाफ एनबीडब्लू वारंट जारी कर दिया। जब इतने पर भी सरकारी चिकित्सक कोर्ट में गवाही देने नहीं आए तो कोर्ट ने एसएसपी मथुरा को निर्देश दिए कि चिकित्सक को गवाही के लिए पेश करें।
पुलिस ने चिकित्सक का मोबाइल नंबर ट्रेस कर बुधवार को जब कोर्ट के समक्ष पेश किया तो उन्होंने गवाही देने से साफ मना कर दिया। इसके चलते कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया। गुरुवार को एसीएमओ ने न केवल न्यायालय के समक्ष गवाही दी बल्कि अपना एनबीडब्लू समाप्त करने संबंधी प्रार्थना पत्र भी दिया। यह प्रार्थना पत्र कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और एसएमओ को जेल से रिहा करने के आदेश दिए। एडीजीसी भीष्मदत्त तोमर ने बताया कि एसीएमओ को गुरुवार शाम को जेल से रिहा कर दिया जाएगा।