मंदिरों का कार्य समाज का आध्यात्मिक विकास करना है। इन पर समाज से अनाचार, कुरीति और कुप्रथाओं का दमन करने की भी जिम्मेदारी है। हर धर्म और सम्प्रदाय का अपना मंदिर (पूजा स्थल) होता है। इस तरह ये मंदिर राष्ट्र और समाज के उत्थान के प्रेरक हैं।
यह बात शुक्रवार को राज्यपाल राम नाईक ने राधा निवास क्षेत्र स्थित बड़ा खटला में महा-सम्प्रोक्षण महोत्सव के दौरान कही। वे यहां भगवान वरदराज के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में भाग लेने आए थे। महामहिम राज्यपाल ने अपने संबोधन में संस्कृत भाषा को भारत की आत्मा बताया और कहा कि हमें भारत की आत्मा को निरंतर आगे बढ़ाने का काम करना है। उन्होंने सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का भी आह्वान किया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड संस्कृत महाविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूषकांत दीक्षित ने कहा कि संस्कृत और संस्कृति से ही विश्व में भारत की पहचान है। संस्कृत के बिना भारत पूरा नहीं हो सकता। विधायक प्रदीप माथुर ने अपने संबोधन में सहजता को मानव जीवन का बड़ा गुण बताया। डा. मदनमोहन पाठक ने भारतीय जीवन पद्धति से ज्योतिष शास्त्र का संबंध और स्वामी श्रीधराचार्य महाराज ने विशिष्टाद्वैत दर्शन के बारे में बताया। परमेश्वर कुमार शर्मा और डा. गिरिराज शास्त्री ने भी विचार व्यक्त किए।
इससे पहले राज्यपाल राम नाईक ने वरदराज कुंज बड़ा खटला में आयोजित महासम्प्रोक्षण प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान चल रहे हवन यज्ञ में आहुतियां दीं। पंडित विजय किशोर मिश्र और दक्षिण भारत से आए पंडित राजू स्वामी के आचार्यत्व में नवीन मंदिर में कलश पूजन किया। निम्बार्क जूनियर हाईस्कूल के छात्रों ने राज्यपाल के समक्ष राष्ट्रगान गाया।
इस अवसर पर स्वामी जयकृष्णाचार्य महाराज, जगद्गुरु स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य, स्वामी रामेश्वराचार्य महाराज, पालिकाध्यक्ष मुकेश गौतम, महामंडलेश्वर नवल गिरि, महंत फूलडोल बिहारीदास, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सोहन सिंह सिसौदिया, महंत गोपीकृष्ण महाराज, ब्रजकिशोर त्रिपाठी, डा. मनोज मोहन शास्त्री आदि उपस्थित रहे।