दस साल से वेतन न देने की शिकायत मधुबाला कुशवाहा ने अब राज्यपाल से की है। पीड़िता का कहना है कि दस साल से बेसिक शिक्षा विभाग ने उनका वेतन रोक रखा है। अफसरों के मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न के चलते वो अकाल मृत्यु के कगार पर आ गई हैं।
शिक्षिका ने बताया है कि राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल महावन में दो सहायक अध्यापिका के स्वीकृत और रिक्त पद थे। जिस पर तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने साठगांठ कर चार सहायक अध्यापकों को बिना कार्यभार ग्रहण कराए अवैध भुगतान कर दिया। शिक्षिका ने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो अफसर उत्पीड़न पर उतर आए। वर्ष 2005 से जबरन वेतन रोक दिया और समस्त देयों का भुगतान नहीं किया गया है। नौ सितंबर 2014 को तहसील दिवस में एक प्रार्थना पत्र दिया। इस प्रकरण का निस्तारण और दोषियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़िता ने अब राज्यपाल, केंद्रीय राज्यमंत्री मानव संसाधन मंत्रालय भारत सरकार, शिक्षा मंत्री प्रदेश सरकार से न्याय की गुहार लगाई है।
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सूचना न देने पर अफसरों पर हो चुका है जुर्माना
महावन राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल में कार्यरत सहायक अध्यापिका मधुबाला कुशवाहा ने इस प्रकरण में जनसूचना अधिकार के तहत सूचनाएं मांगी तो अफसरों ने चुप रहने में ही भलाई समझी। इस पर जुर्माना भी लगा। शिक्षिका को मांगी गई सूचना न देने पर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) आगरा डा. अंजना गोयल, तत्कालीन बीएसए राजू राणा, प्रधान अध्यापिका राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल महावन पर आयोग से जुर्माने की कार्रवाई हो चुकी है। पीड़िता का आरोप है कि जुर्माना लगने के बाद भी न तो अफसरों से इसकी वसूली की गई और न ही उसे वो सूचनाएं मिलीं जिस पर जुर्माने की कार्रवाई की गई।