कन्हैया के जन्म महोत्सव में शामिल होने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत को आतुर ब्रजवासियों को पालिका प्रशासन ने झटका दिया है। अब जन्माष्टमी पर प्रसाद भंडारे का आयोजन करने वालों को कर देना होगा। प्रशासन ने भी कर अदायगी के बाद ही भंडारे की स्टाल लगाने की अनुमति देने की बात कही है।
गौरतलब है भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में हर साल करीब 10 लाख श्रद्धालु मथुरा आते हैं। इनमें बड़ी संख्या कम आयु वर्ग के भक्तों की रहती है। यह भक्त भगवान श्रीकृष्ण के जन्म उत्सव और अगले दिन नंदोत्सव का आनंद लेते हैं। इस दौरान श्रद्धालु भंडारों में प्रसाद पाकर सड़कों पर ही रैन बसेरा करते हैं।
भक्तों के स्वागत और जलपान के लिए इंतजाम ब्रजवासियों द्वारा किया जाता है। इसके लिए शहर में लगभग 200 प्रसाद भंडारे लगाए जाते हैं। इनमें जन्माष्टमी वाले दिन फलाहार, पूरी सब्जी, कुटू प्रसाद का वितरण होता है। अगले दिन नंदोत्सव पर कढ़ी चावल, छोले चावल बांटे जाते हैं।
इस बार पालिका ने इन भंडारे का आयोजन करने वालों के लिए कर अदा करने का फरमान जारी कर दिया है, जिसमें प्रत्येक भंडारे पर ढाई हजार रुपये टैक्स अदा करने की बात कही है। इधर, प्रशासन ने अनुमति के लिए इस कर अदायगी की रसीद प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न करने की शर्त रख दी है। भंडारा आयोजकों में पालिका के इस कदम से रोष है। आयोजक इस कर को ‘जजिया कर’ की संज्ञा दे रहे हैं।
मुगल काल में लगता था ‘जजिया कर’
मुगल काल में मुस्लिम शासक हिंदू धर्म के धार्मिक आयोजनों पर कर वसूलते थे। इसे ‘जजिया कर’ की संज्ञा दी जाती थी। इसमें तीर्थ यात्रा पर जाना और अन्य धार्मिक आयोजन से पहले कर अदा करना शामिल रहता था।
भंडारे लगाने वाले सफाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं करते हैं। इस कर से पालिका बाहर के कर्मचारी लगाकर सफाई व्यवस्था को अंजाम देगी।
विजय कुमार
निकाय प्रभारी और नगर मजिस्ट्रेट मथुरा