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वृंदावन शोध संस्थान में ‘भ्रष्टाचार’ का खुलासा

Mon, 31 Aug 2015 11:20 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला वृंदावन
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आरटीआई कार्यकर्ता के प्रयासों से वृंदावन शोध संस्थान में खर्चों में अनियमितताओं के बड़े मामले का खुलासा हुआ है। संस्थान के संबंध में संस्कृति मंत्रालय से शिकायत के बाद आडिट कराया गया जिसमें व्यय में कई अनियमितताएं सामने आईं। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मुख्य लेखा नियंत्रक की ये आडिट रिपोर्ट 12 अगस्त को जनसूचना के तहत उनको सौंपी गई। इसमें संस्थान को सरकारी अनुदान के दुरुपयोग का दोषी पाया गया है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि दुरुपयोग की गई अनुदानित राशि को मय ब्याज के संबंधित लोगों से वसूल किया जाए।
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वृंदावन निवासी सुरेशचंद्र शर्मा एडवोकेट ने 17 फरवरी, 2014 को संस्कृति मंत्रालय से वृंदावन शोध संस्थान में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। बताया गया कि इसके बाद 8 जनवरी, 2015 में संस्थान में आडिट कराया गया। 26 जून, 2015 को उन्होंने आरटीआई के तहत अपनी शिकायत पर जांच के बारे में जानकारी मांगी, जिसके जवाब में उनको आडिट रिपोर्ट भेजी गई है।

संस्थान को संस्कृति मंत्रालय की ओर से स्वीकृत ब्रज संस्कृति परियोजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। छ: खंडों में प्रस्तावित योजना की लागत 63 लाख रुपये रखी गई, जिसे पांच खंडों में पूरा किया जाना था लेकिन 31 मार्च 2014 तक इस योजना पर 41,85,000 रुपये व्यय किए जा चुके हैं, किंतु विश्वकोश का एक खंड ही प्रकाशित हुआ है।
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संस्थान की ओर से 2015 में आयोजित सेमिनार के लिए सरकार द्वारा डेढ़ लाख रुपये आवंटित किए गए लेकिन इस सेमिनार में 6,06,361 रुपये खर्च कर दिए गए। जांच में पाया गया कि सेमिनार में सम्मिलित 40-42 लोगों के भोजन के लिए 1,65,810 रुपये का व्यय दिखाया गया। सेमीनार, वर्कशॉप के लिए वर्ष 2012-13 में मिले 1,62,787 रुपये के अनुदान को संस्थान ने अपने स्थापना दिवस समारोह में ही खर्च कर डाला। जिसमें कवि सम्मेलन पर ही 66,000 का खर्च दिखाया गया।

वर्ष 2011-12 में इसी मद में पांच लाख के अनुदान में से प्रोजेक्टर और कंप्यूटर की खरीद पर 4,07,526 रुपये व्यय दिखाया गया। 1,61,288 संस्थान के स्थापना दिवस में खर्च बताए गए। जिससे बजट 68,814 रुपये अधिक बढ़ गया।

बजट संबंधित मद में ही खर्च करें
ऑडिट में वृंदावन शोध संस्थान को विविध मदों में दिए गए बजट को उसी विशेष मद में खर्च करने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट के पैरा नंबर 9 में बताया गया कि संस्थान में स्टाक रजिस्टर, पुस्तकालय रजिस्टर, एतिहासिक और कलागत महत्व के सामानों का भी लेखाजोखा सही प्रारूप में नहीं पाया गया। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि वर्ष में एक बार संस्थान की संपत्तियों का सत्यापन होना चाहिए।


दो एलसीडी टीवी 5 लाख के
आरटीआई कार्यकर्ता सुरेशचंद्र शर्मा के अनुसार संस्थान की ओर से सैमसंग कंपनी के 55 इंच के दो एलसीडी टीवी 4,99,999 रुपये में क्रय किए गए। गोदरेज की कुर्सी-मेजों की खरीद 3,75,305 रुपये में हुई। खास बात यह है कि यह खरीद एकमात्र कुटेशन मंगाकर की गई। इसी प्रकार वर्ष 2013-14 में 13,67,016 रुपये में साउंड सिस्टम खरीदा गया। जिसमें केवल तीन लोगों से निविदाएं आमंत्रित की गईं। न्यूनतम निविदा का तुलनात्मक दस्तावेज भी तैयार नहीं किया गया। जबकि नियमानुसार 4 कंपनियों से निविदाएं मंगाई जानी चाहिए।
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भारत सरकार की टीम ने पांच दिन तक आडिट किया, जिसमें संस्थान द्वारा पूर्ण सहयोग किया गया। लेकिन अभी आडिट की रिपोर्ट हमें प्राप्त नहीं हो पाई है।
- महेश नारायण शर्मा, निदेशक वृंदावन शोध संस्थान
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