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अपने को बदलो, क्रोध को पीना सीखो : तरुण सागर

Thu, 03 Dec 2015 11:40 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
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जैन मुनि तरुण सागर ने कहा है कि दुख परिवार के सदस्य नहीं हैं। वे मेहमान की तरह है, इनका आना-जाना लगा रहता है। घर में अगर शांति चाहते हो तो अपने आप को बदलो और क्रोध को पीना सीखो।
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संत तरुण सागर कृष्णानगर के पार्क में आयोजित ‘कड़वे प्रवचन’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य रोज नए दोस्त बनाता है, पुराने दोस्तों को छोड़कर उन्हें बदल देता है। कपड़े रोज बदलता है, खाना रोज बदल-बदलकर खाता है। गाड़ी वाहन, मकान सब बदल लेता है लेकिन अपना चरित्र और आचरण नहीं बदलता। अगर कुछ बदलना है तो अपने आप को बदलो। अगर खुद को नहीं बदला तो कुछ नहीं बदला।

जीवन का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि जीवन का महत्व तब पता चलता है जब उसकी सांस थमने लगती है। सिर का असली एहसास जब होता है जब सिर में दर्द होने लगता है। दुनिया में चार बातें सबसे कठिन हैं। अपने मन को समझाना, मन को पवित्र रखना, विचारों को पवित्र रखते हुए आचरण सुधारना और इंद्रियों पर नियंत्रण करना। इसलिए खुद को बदलिए। इसकी शुरुआत आज से ही कीजिए। इसकी शुरुआत खुद से करिए।
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जैन मुनि ने कहा कि चार बातों पर नियंत्रण होने पर जीवन के असली मर्म का पता चलता है और जीवन का असली आनंद महसूस होता है। उन्होंने कहा कि जब जीवन में दुख: आता है तभी मनुष्य भगवान को याद करता है। यदि मनुष्य भगवान को सुख में याद करता रहे तो दुख के पल कम होते चले जाते हैं।

उन्होंने परिवारों में हो रहे विखंडन व बढ़ रहे तनाव, अलगाव पर कड़वी बातें कहीं। कहा कि आज हर व्यक्ति की सहन शक्ति कमजोर हो रही है। हर आदमी जरा सी बात पर गुस्से से लाल हो जाता है। क्रोध का तेवर कम करना है तो चुप रहिए। चुप रहने से सामने वाला थोड़ी देर बाद शांत हो जाएगा। और क्रोध शांत होने के बाद जो आपसी सहमति बनेगी उससे परिवार में शांति व खुशियां आएंगी।
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