जैन मुनि तरुण सागर ने कहा है कि मां-बाप की पूजा पहली पूजा है। इनका आपको कभी भी दिल नहीं दुखाना है। आपका सबकुछ चला जाए तो भी परवाह नहीं करना लेकिन चेहरे से मुस्कराहट नहीं जानी चाहिए।
जैन मुनि राधानगर पार्क में कड़वे प्रवचनों के माध्यम से लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जमीन-जायदाद चली जाए, लड़का चला जाए कोई चिंता मत करना लेकिन चेहरे की मुस्कराहट नहीं जानी चाहिए। क्योंकि अगर हमारे चेहरे पर मुस्कराहट रहती है तो सब लोग हमारे इर्दगिर्द रहते हैं लेकिन जैसे ही मुस्कराहट चली जाती है लोग भी हमें छोड़कर चले जाते हैं।
उन्होंने कहा कि व्यावहारिक सच्चाई बीबी, बच्चे, जमीन-जायदाद को तो हम समझते हैं लेकिन वास्तविक सच्चाई ये शरीर और सबकुछ यहीं छोड़कर जाना है, को भूल जाते हैं। जो वास्तविक सच्चाई को याद रखते हैं वो अध्यात्म जगत के बादशाह बन जाते हैं।
जैन मुनि ने कहा कि दुनिया में अमृत कम है हमें कड़वे ही कड़वे घूंट को पीना है। सुखी जीवन जीने के लिए सुनने की आदत डालो। कहने वाले अपनी करनी से बाज नहीं आएंगे। उन्होंने उदाहरण दिया कि कपड़े को चूहा काटता है तो बंटाधार कर देता है लेकिन दर्जी काटता है तो उद्धार कर देता है।
कोई अपने जीवन को तीर्थ बनाकर जीता है तो कोई तमाशा बनाकर जीता है। इस अवसर पर पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, अनूप सिंह, प्रवेंद्र अग्रवाल, सेठ विजय कुमार, जयप्रकाश, ऋषभ जैन, यतींद्र जैन, किशन जैन, प्रदीप अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
इन चार बातों का करें चिंतन
1-एक दिन सबकुछ छोड़कर जाना है
2-जो भाग्य में है वह कहीं नहीं जा सकता है, जो चला गया वो आपके भाग्य में ही नहीं था
3-मां-बाप पहली पूजा हैं उनका दिल कभी नहीं दुखाना है
4-जीते जी ऐसे सत्कर्म करें कि मरने के बाद आत्मा की शांति के लिए किसी को ईश्वर से प्रार्थना न करनी पड़े