पीओके में भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक की गूंज चहुंओर है। 1971 की लड़ाई में तो भारतीय सैनिकों ने ऐसा पराक्रम दिखाया कि पाकिस्तान की फौज टैंक छोड़कर ही भाग गई थी। उसके सैनिकों ने सरेंडर कर दिया था। मथुरा की कोर स्ट्राइक-वन पाकिस्तानी सेना के टैंकरों को खींचकर भारत ले आई थी। स्ट्राइक वन के पराक्रम की यह निशानी आज भी आगरा में हैं।
पाकिस्तान ने भारत से कोई एक बार मात नहीं खाई बल्कि कई दफा भारत की सीमा की तरफ बढ़ती पाकिस्तान की फौज को जान बचाकर भागना पड़ा है। पूर्व सैनिक संघ मथुरा के महासचिव व मथुरा स्ट्राइक वन में अपनी सेवा दे चुके खेम चंद्र शर्मा का कहना है कि 1971 में पाक सेना ने पंजाब क्षेत्र के छतरगढ़ की तरफ से अटैक किया था।
भारतीय सेना ने ऐसा जवाब दिया कि पाकिस्तान की सेना मैदान में टिक नहीं पाई थी। अपने कई टैंक छोड़कर पाक सेना भाग गई थी। इन सभी टैंक को मथुरा की कोर स्ट्राइक वन अपने साथ ले आई। यह सभी टैंक आज भी आगरा में रखे हुए हैं। कर्नल तेज सिंह का कहना है कि हर बार भारत ने दुश्मन को सुधरने का मौका दिया है।
मगर जब पानी सिर से ऊपर चला जाता है तब सरप्राइज अटैक भी जरूरी हो जाते हैं। आर्मी के पूर्व अफसरों का कहना है कि मौजूदा समय में सर्जिकल स्ट्राइक बहुत जरूरी थी। पीओके में घुसकर 38 आतंकियों को मारकर सेना ने देश का गौरव बढ़ाया है। सरकार को चाहिए कि जरूरत पर इस प्रकार के सरप्राइज अटैक करने में हिचकना नहीं चाहिए।