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Mathura News: एथलेटिक्स डे पर विशेष....अभावों में भी निखर रही हैं प्रतिभाएं

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मथुरा। ब्रज में खिलाड़ी सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी प्रतिभा का लोहा राष्ट्रीय स्तर पर मनवा रहे हैं। आधुनिक सुविधाओं, उच्च स्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों और आर्थिक तंगी के अभाव के बावजूद इन खिलाड़ियों ने अपने दम पर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि जिले का गौरव बढ़ाया है।
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मथुरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले कई खिलाड़ी कठिन परिस्थितियों में अभ्यास कर रहे हैं। कई खिलाड़ी तो खेतों, कच्चे मैदानों और साधारण ट्रैक पर अभ्यास कर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच रहे हैं। जिला एथलेटिक्स एसोसिएशन के सचिव जय सिंह ने बताया कि कि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं, आधुनिक उपकरण और आर्थिक सहयोग मिल जाए, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।


अमित कुमार : 400 मीटर बाधा दौड़ में राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर मेडल जीतने वाले अमित कुमार संघर्ष मिसाल हैं। उनके पिता का निधन हो चुका है, लेकिन उनके ताऊ भगत सिंह, जो न्यायिक विभाग में स्टेनो हैं ने उनकी जिम्मेदारी उठाकर इस मुकाम तक पहुंचाया।
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सोनिया उपाध्याय: कुड़वारा (मांट) निवासी सोनिया उपाध्याय ने 3 किलोमीटर दौड़ में राष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉन्ज मेडल जीता है। उनके पिता केशव देव उपाध्याय इलेक्ट्रिशियन का कार्य करते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने बेटी सोनिया को खेलने में कभी बाधा नहीं आने दी।



रजत कुमार: जरैलिया (बाजना) के रजत कुमार, के पिता किसान हैं। वह अंडर-16 में राष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। वर्तमान में वे अंडर-20 वर्ग में 79.99 मीटर थ्रो के साथ बेहतर प्रदर्शन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना है।



राम रतन (क्रॉस कंट्री): राम रतन ने क्रॉस कंट्री दौड़ में राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त किया। सीमित संसाधनों के बावजूद यह प्रदर्शन उनके कठिन परिश्रम को दर्शाता है। पैरा एथलेटिक्स में भी उन्होंने डिस्कस थ्रो में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर नाम रोशन किया है।


हरवीर सिंह: मथुरा के हरवीर सिंह ने पैरा एथलेटिक्स की लंबी कूद में राष्ट्रीय स्तर पर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। हरवीर के पिता किसान हैं। वह बेटे को तैयारी करने में पूरा साथ देते हैं। पूर्व में पैसों की कमी के कारण वह राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने से रह गए थे।



इन सुविधाओं का है अभाव
एथलेटिक खिलाड़ियों के लिए उच्च गुणवत्ता का खेल मैदान और ट्रैक होना चाहिए, जैसे सिंथेटिक रनिंग ट्रैक, लॉन्ग जंप पिट, हाई जंप एरिया और थ्रो इवेंट्स (जैवलिन, शॉटपुट, डिस्कस) के लिए सुरक्षित जोन। खराब या कच्चे मैदान चोट का जोखिम बढ़ाते हैं और प्रदर्शन भी प्रभावित करते हैं। साथ ही योग्य कोच और ट्रेनिंग स्टाफ जरूरी हैं। जिम और फिटनेस सेंटर भी महत्वपूर्ण है, जहां स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कार्डियो और रिकवरी एक्सरसाइज कराई जा सके। खिलाड़ियों के लिए मेडिकल और फिजियोथेरेपी की सुविधा होनी चाहिए। साथ ही नियमित हेल्थ चेकअप भी जरूरी है। डाइट और न्यूट्रिशन सपोर्ट भी अहम है। इसके अलावा ड्रेसिंग रूम, शौचालय, पीने का साफ पानी और आराम की जगह जैसी बेसिक सुविधाएं भी होनी चाहिए।
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