वृंदावन (मथुरा)। कथक नृत्य और ओडिसी की भावांजलि के बीच बांसुरी की सुमधुर तान और तबले की ठाठ ने वृंदावन की भूमि पर ‘ध्रुपद’ गायन के पुरोधा स्वामी हरिदास को नमन किया तो मानो समूचा ब्रज स्वामी हरिदास की तान से तान मिला बैठा।
यह मौका था अखिल भारतीय स्वामी हरिदास संगीत सम्मेलन व स्वामी हरिदास संगीत कला रत्न सम्मान समारोह के समापन का, जहां शास्त्रीय संगीत जगत से जुड़े कलाकार वंशी वादक पंडित अजय प्रसन्ना, नीरज सक्सेना, कोलकाता की ओडिसी नृत्यांगना नंदिनी चौधरी, दिल्ली की कथक नृत्यांगना शैफाली गोयल और शास्त्रीय संगीत गायिका विधि शर्मा आदि ने स्वामी हरिदास को संगीत की लहरियों में सजेश्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर कलाकारों को ‘स्वामी हरिदास संगीत कला रत्न सम्मान’ से नवाजा गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी रामेश्वराचार्य महाराज ने स्वामी हरिदास जी के चित्रपट पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्जवलन कर किया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी संगीत साधना से ही बांकेबिहारी महाराज का प्राकट्य किया। वह ध्रुपद के पुरोधा थे। संस्थान के अध्यक्ष आचार्य अतुल कृष्ण गोस्वामी व समारोह के संयोजक पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ ने मुख्य अतिथि का अभिनंदन किया।
उधर, संगीत समारोह का शुभारंभ कोलकाता से आईं नृत्यांगना नंदिनी चौधरी ने नृत्य से हुआ। उन्होंने ओडिसी नृत्य की परिपाटी में राधा-कृष्ण के प्रेम और मुरली की दीवानी राधा के भाव प्रस्तुत किए। ‘आहे नील शैल: राधा रानी संगे नाचे मुरली..’ बंदिश पर उनकी प्रस्तुति सुंदर रही। भाव नृत्य के जरिए उन्होंने जगन्नाथ पूजा और ‘द्रोपदी की लाज लीला’ का लयबद्ध मंचन किया।
अपने वंशी वादन के लिए देश-विदेश में प्रसिद्धि पाने वाले पंडित अजय प्रसन्ना ने अपनी वंशी की सुमधुर धुन सुनाई।। लखनऊ से आए नीरज सक्सेना का वंशी वादन भी शानदार रहा। इनके साथ तबले पर प्रियांश और ढोलक पर मास्टर तन्मय ने संगत की।
कथक कलाकार शैफाली गोयल ने गत ठाठ में गणेश स्तुति के साथ पुष्पांजलि दी। इसके बाद उन्होंने तीन ताल में उठान, आमद, टुकड़े और तोड़े प्रस्तुत किए। भाव पक्ष में गत निकास सुंदर रहा। उधर, दिल्ली से आईं विधि शर्मा ने अपने शास्त्रीय गायन का मंचन किया।
उन्होंने ‘देखो री या मुकुट की लटकन...’ और ‘राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा..’ के अलावा बंदिश प्रस्तुत की। इनके साथ तबले पर प्रशांत त्रिवेदी की संगत बेहतरीन रही। कार्यक्रम का समापन कलाकारों को स्वामी हरिदास संगीत कला रत्न सम्मान से नवाजा गया।
इस अवसर पर महेशानंद सरस्वती महाराज, स्वामी फतेहकृष्ण, महंत परमेश्वरवदास, महंत अमर दास, मधुसूदन महाराज, राम किशन गोस्वामी, ब्रज बिहारी शर्मा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन रश्मि शर्मा ने किया।