मथुरा। शेरगढ़ नौहझील मार्ग पर यमुना के पानी में से निकलते वाहन।
- फोटो : mathura
मथुरा। यमुना जलस्तर कम होने के बाद प्रशासन की टीम बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के सर्वे में जुट गई है। अब तक दर्जनों गांवों में सैकड़ों बीघा फसल नष्ट होने का सर्वे हो चुका है। सर्वे कार्य पूरा होने के बाद किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।
हालांकि कुछ क्षेत्र अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं, जहां यमुना का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है। 10 दिन तक लबालब पानी भरे रहने से फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। सोमवार को प्रयाग घाट का यमुना का जलस्तर 165.31 मीटर दर्ज किया गया है।
बीते दिनों यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 166.00 मीटर से अधिक पहुंचने पर कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। जयसिंहपुरा, नौहझील, मांट और वृंदावन समेत कई क्षेत्रों में यमुना का पानी घुस गया। कई गांव के मार्ग बाधित हो गए और सैकड़ों बीघा फसलें डूब गईं। तीन दिन से लगातार यमुना का जलस्तर कम हो रहा है। बीते 24 घंटे में यमुना का जलस्तर घटकर सोमवार शाम को 165.45 मीटर से 165.31 मीटर तक आ गया है।
सिंचाई विभाग के अपर खंड एक्सईएन नवीन कुमार ने बताया कि सोमवार शाम को हथिनीकुंड से 33029 क्यूसेक और ओखला से 26236 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जबकि गोकुल बैराज से 59740 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। गोकुल बैराज से अधिक मात्रा में पानी डिस्चार्ज होने से हालात को काबू में लाया गया है, लेकिन लोगों की मुश्किलें अभी बरकरार हैं। अधिकारी-कर्मचारी लगातार बाढ़ प्रभावितों की मदद कर रहे हैं और सतर्कता भी बरत रहे हैं। साथ ही प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीम लोगों की मदद करने में जुटी हुई है। नष्ट फसलों का सर्वे भी कराया जा रहा है।