स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव में सहभागिता करने आईं लखनऊ घराने की प्रख्यात कथक नृत्यांगना सुरभि टंडन का कहना है कि ऐसे आयोजन आज के युवाओं को संगीत के करीब लाते हैं। यदि भ्रमित युवाओं को संगीत से जोड़ने का कार्य किया जाए तो देश में आपराधिक घटनाओं में कमी आएगी।
युवा वर्ग समाज और राष्ट्र के विकास में सहायक बनेगा। उन्होंने कहा कि कथक नृत्य की उत्पत्ति कृष्ण से मानी गई है और उन्हीं कृष्ण की धरा पर नृत्य प्रस्तुति देना प्रभुकृपा के बिना संभव नहीं है। युवा वर्ग को शास्त्रीय संगीत से जुड़े रखने के लिए पूरे देश में स्वामी हरिदास महोत्सव जैसे आयोजन व्यापक स्तर पर होने चाहिए।
हरिदास महोत्सव को संरक्षण मिले: सलिल भट्ट
स्वात्विक वीणा वादक पं. सलिल भट्ट का कहना है कि वर्तमान में केवल फिल्मों का बोलबाला है। ऐसे समय में हजारों वर्ष पुराने भारतीय संगीत धरोहर को बचाने की जरूरत है। मध्य प्रदेश सरकार ने जिस तरह तानसेन महोत्सव को बढ़ावा देकर उसका प्रचार-प्रसार किया है। वैसे ही प्रदेश सरकार को भी स्वामी हरिदास महोत्सव को संरक्षण प्रदान करना चाहिए। ताकि संगीत कला को प्रोत्साहन मिल सके। उन्होंने कहा कि अन्य जगहों के मुकाबले संगीत कलाकारों को ब्रजभूमि में बहुत अधिक सम्मान मिलता है।
जहां संगीत वहां भगवान: पं. छन्नूलाल मिश्रा
शास्त्रीय संगीत गायक बनारस के पद्मश्री पं. छन्नूलाल मिश्रा ने कहा है कि जहां संगीत होता है, वहां भगवान का वास होता है। स्वामी हरिदास संगीत महोत्सव में आए छन्नूलाल मिश्रा ने कहा कि संगीत सुनकर यदि आनंद आ जाए तो समझो भगवान की प्राप्ति हो गई। संगीत के बिना मानव जीवन नीरस रहता है। स्कूली पाठ्यक्रम में संगीत अनिवार्य होना चाहिए। जिससे संगीत कला का संरक्षण और संवर्धन हो सके। स्वरलय शब्द ही संगीत है और भगवान शंकर स्वरलय संगीत के निर्माता हैं। जबकि भगवान श्रीकृष्ण स्वरलय संगीत के प्रचारक है। उन्होंने कहा कि फिल्म वालों ने संगीत का नाश कर दिया है। आज फिल्मों के गाने समझ से परे हैं। लोग कुछ समय सुनकर उनसे बोर होने लगते हैं। उन्होंने संगीत कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए अलग से मंत्रालय के बारे में उन्होंने कहा कि वह इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वार्ता करेंगे। वैसे मोदी ने भारत को विश्व में अलग स्थान दिलाया है। वे देश को विकास की राह पर आगे बढ़ा रहे हैं।
संगीतज्ञों को गोद लें औद्योगिक घराने: पं. विश्वमोहन भट्ट
ग्रेमी अवार्ड विजेता मोहन वीणा वादक पं. विश्वमोहन भट्ट ने कहा है कि युवाओं को संगीत से जोड़ना बहुत आवश्यक है। एक चित्रकार की तरह संगीतकार भी अपने राग सुरों के माध्यम से श्रोताओं को बांधे रखने का कार्य करता है। कलाकार की विविधता, अनुभव और ज्ञान उसकी प्रस्तुति से आंकी जाती है। हमारी धरोहर शास्त्रीय संगीत का संरक्षण युवाओं के हाथों में ही है। आज भी पूरे विश्व में भारतीय संगीत का लोहा माना जाता है क्याेंकि शास्त्रीय संगीत हर समय हर पल नया रहता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत कला को बनाने और उसे संरक्षित करने के लिए देश के औद्योगिक घरानों को क्रिकेटरों की तरह संगीतज्ञों को गोद लेना चाहिए। देश में जानवरों का अस्तित्व बचाने के लिए सरकारों के पास योजनाएं है लेकिन संगीत कला को संवारने एवं प्रोत्साहन देने के लिए सरकारें प्रयास नहीं करती। उन्होंने कहा कि सरकारों ने कभी भी संगीत और संगीतज्ञों की भलाई के लिए कोई कार्य नहीं किए। न ही संगीत के संर्वधन के लिए मंत्रालय बनाया गया है।