गुड़गांव निवासी युवक ने वृंदावन की धर्मशाला में आत्महत्या कर ली। शनिवार को दुर्गंध आने पर कमरे को खोला गया तो घटना का पता चला। घटनास्थल से सुइसाइड नोट भी मिला है।
मृतक धीरज (23) 11 जून की शाम को वृंदावन आया था। यहां वो बांके बिहारी मंदिर के समीप जीवन वल्लभ धर्मशाला के कमरा नंबर-22 में ठहरे। बताया गया कि कमरे में सामान रखने के बाद धीरज ने ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दर्शन किए और वापस आकर कमरे में बंद हो गए। इसके बाद उनको किसी ने बाहर निकलते नहीं देखा।
शनिवार की दोपहर दुर्गंध आने पर लोगों ने प्रबंधक सतीश को जानकारी दी। उन्होंने दरवाजा खटखटाया। दरवाजा न खुलने पर खिड़की से झांककर देखा।
कमरे में पंखे से बंधी हुई रस्सी से धीरज का शव लटक रहा था। सूचना पर बांके बिहारी पुलिस पहुंची और दरवाजा तोड़ा गया। पुलिस को बिस्तर पर दो पन्ने का सुइसाइड नोट मिला। जिसमें धीरज ने आत्महत्या के लिए अपने को जिम्मेदार ठहराया है।
तनाव सहन नहीं कर सके धीरज
वृंदावन। धीरज के सुइसाइड नोट से उनके बहुत तनावग्रस्त होने की बात सामने आई है। सुइसाइड नोट के अनुसार धीरज ने 13 मई को भी वृंदावन आकर जीवन लीला समाप्त करने की ठानी थी लेकिन वह बादशाहपुर से ही लौट गए। सुइसाइड नोट में लिखा गया है कि संत महात्मा सब भक्ति का दिखावा करते हैं। भागवत कथा आदि के आयोजन सब पाखंड है। व्यक्ति को सीमित पूजा-कर्म करना चाहिए। अत्यधिक पूजा-कर्म करने से कोई लाभ नहीं मिलता।