फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दतिया कांड: 15 को उम्रकैद के बाद गांव में तनाव, घटना को याद कर आज भी दहल उठते दिल

Thu, 01 Feb 2024 11:46 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

मथुरा के दतिया कांड में 15 को उम्रकैद के बाद गांव में तनाव है। घटना को याद कर आज भी लोगों के दिल दहल उठते हैं।
विज्ञापन
दतिया कांड: 15 को उम्रकैद के बाद गांव में तनाव, घरों में नहीं जले चूल्हे - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश के मथुरा में 23 जनवरी 2001 को हुए जातीय संघर्ष के 15 दोषियों को बुधवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके बाद गांव में तनाव का माहौल पैदा हो गया है। दोषी पक्ष के घरों में बृहस्पतिवार को भी चूल्हे नहीं जले। गांव में दिन भर दोनों पक्षों के इलाकों में बैठक-चर्चाओं का दौर चलता रहा। सवर्ण पक्ष के लोगों में नाराजगी थी तो वहीं, अनुसूचित जाति पक्ष के लोगों के घरों में खुशी का माहौल था।

विज्ञापन


मामला हाईवे थाना क्षेत्र के दतिया गांव का है। यहां जातीय संघर्ष में छह माह की गुड़िया जिंदा जल गई थी। 23 साल बाद कोर्ट से इंसाफ होने के बाद उसके घर में खुशियां छा गई। गुड़िया का पिता चंदन सिंह फर्नीचर का काम करते हैं। मां कमलेश गृहिणी हैं। दंपती ने बताया कि गुड़िया उनकी पहली बेटी थी। उस वक्त एक और बेटा श्याम सिंह भी मासूम ही था। गनीमत रही कि वह बच गया। परिवार में तीन और बेटियां हैं। इनमें से दो की शादी अब हो चुकी है।

गोली से घायल राजेंद्र के परिवार ने 22 साल पहले छोड़ा गांव

जातीय संघर्ष में हुई गोलीबारी में घायल राजेंद्र सिंह का परिवार गांव छोड़कर जा चुका है। गांव के रामगोपाल सिंह बताते हैं कि उसके परिवार को इस कदर भय लग गया था कि उन्होंने गांव छोड़कर आगरा स्थित भीमनगरी में अपना आशियाना बना लिया। यहां से जाने के बाद वह वापस कभी लौटकर गांव नहीं आए। गांव के लोगों ने काफी बार उनको बुलाने की कोशिश की, मगर उन्होंने आने से मना कर दिया।

हाल-ए-दतिया

दतिया गांव में बृहस्पतिवार को अनुसूचित जाति के घरों में खुशियां छाई हुईं थीं। सुबह करीब 11 बजे इस पक्ष के लोग एकत्रित होकर बैठे थे। वह फैसले को लेकर अपने-अपने तर्क दे रहे थे। गांव के बुजुर्ग उस भयाभय मंजर की कहानी युवा पीढ़ी को सुना रहे थे। पीतम प्रधान ने कहा कि गांव में चार माह तक पीएसी का डेरा रहा था। लोग डर के साये में रहते थे। 
 

बुधवार रात गांव में तनाव के हालात

गांव के लोगों ने बताया कि फैसला आने के बाद बुधवार रात को गांव के दोनों पक्षों के लोगों को नींद नहीं आई। एक पक्ष ने तो गांव में आते ही गाली-गलौज शुरू कर दी, मगर दूसरे पक्ष ने धैर्य रखा और कोई भी प्रतिक्रिया नहीं की। माहौल ऐसा था कि कोई भी प्रतिक्रिया किसी भी वक्त बड़े बवाल का रूप ले सकती थी। मगर, लोगों ने धैर्य रखा और पुरानी घटना से सबक लिया।

संघर्ष के बाद फिर कभी एक न हुए दोनों पक्ष

23 साल पहले हुए जातीय संघर्ष के विषय में दतिया गांव के होतीराम बताते हैं कि उस वाकये से पहले गांव के दोनों पक्षों का एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होने का चलन था। मगर, जातीय संघर्ष ने एक बड़ी खाई दोनों पक्षों के बीच में पैदा कर दी। बेशक घटना को 23 साल बीत गए हैं। मगर, गांव के दोनों पक्ष एक नहीं हो सके हैं। दोनों पक्षों में से कोई भी एक-दूसरे के इलाके में नहीं जाता है।

पंचायती भूखंड पर अब ग्राम सचिवालय और बरातघर

जिस पंचायती भूखंड पर स्वामित्व को लेकर 23 साल पहले दतिया में जातीय संघर्ष हुआ, उस पर वर्तमान में अनुसूचित जाति पक्ष का अधिकार है। ग्राम सचिवालय इस पर बना हुआ है। इसके अलावा अब एक बरातघर भी बना हुआ है, जिसमें शादियां होती हैं।

 

विज्ञापन

5.47 लाख रुपये मृत मासूम के परिवार को दिए जाने का आदेश

एडीजे एससी-एसटी कोर्ट मनोज कुमार मिश्रा की अदालत ने 15 दोषियों को आजीवन कारावास के साथ ही 73-73 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कुल जुर्माना राशि 10.95 लाख रुपये बन रही है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि 50 प्रतिशत धनराशि मृतका के पिता को दी जाए। वहीं, शेष 50 प्रतिशत धनराशि घटना के चोटिलों को दी जाए। दतिया गांव में शांति कायम है। पुलिस निगरानी रखे है। बृहस्पतिवार शाम गश्त भी कराई गई। दोनों पक्षों से शांति की अपील है। - डॉ. अरविंद कुमार, एसपी सिटी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें