मथुरा में प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के खिलाफ केस लड़ रहे कथावाचक की कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के कपड़े पहनकर आए युवकों ने पिटाई कर दी। आरोप है कि एमपी/एमएलए कोर्ट के शासकीय अधिवक्ता के इशारे पर वादी के साथ यह घटना हुई।
वृंदावन के एक आश्रम पर कब्जा करने वाले अधिकारियों, भूमाफिया को संरक्षण देने एवं विजिलेंस जांच को प्रभावित करने को लेकर कथा वाचक कौशल किशोर ठाकुर ने एमपी/एमएलए की कोर्ट में वाद दायर किया था। बुधवार को मामले की सुनवाई हुई। कथावाचक का पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना सिंह ने कोर्ट में बहस की।
आरोप है कि सुनवाई खत्म होने के बाद जैसे ही कथावाचक कोर्ट से बाहर निकले। शासकीय अधिवक्ता और उनके साथ आए अधिवक्ताओं के कपड़े पहने युवकों ने उनके बाल पकड़ लिए और खींचने लगे। सभी ने उनके साथ अभद्रता कर पिटाई की। कथावाचक के अधिवक्ता और उनके जूनियर ने किसी तरह उन्हें बचाया और पुलिस को सूचना दी।
सिविल लाइन पुलिस कथावाचक को अधिवक्ता के चैंबर में ले गई। अपने अधिवक्ता के चैंबर में ही कथावाचक ने चौकी प्रभारी को रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दी। सीओ सिटी भूषण वर्मा का कहना है कि पीड़ित की तहरीर मिल गई है। जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एमपी/एमएलए कोर्ट के शासकीय अधिवक्ता हरेंद्र शर्मा ने कहा कि शासकीय अधिवक्ता का काम होता है सरकार की ओर केस लड़ना। न कि वादी या प्रतिवादी के साथ मारपीट करना। कथावाचक ने जो आरोप लगाए हैं वह निराधार हैं। कथावाचक ने मीडिया की सुर्खियों में आने के लिए पूरा ड्रामा रचा है।