मथुरा। खेल के माध्यम से युवा अपनी जिंदगी संवार रहे हैं। क्रिकेट, हॉकी, एथलेटिक्स और स्केटिंग सहित अन्य खेलों में स्थानीय खिलाड़ी भले ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल न कर पाए हों पर खेलों को उन्होंने अपनी रोटी-रोजगार का साधन बना लिया है। आज राष्ट्रीय युवा दिवस है, इस दिवस को साकार कर रहे युवाओं ने अपना भविष्य अपनी रुचि के अनुसार चुना है।
बचपन से क्रिकेट में ही रुचि थी। 2015 में साउथ अफ्रीका और इसके बाद श्रीलंका और दुबई में तीन-तीन बार क्रिकेट टूर्नामेंट खेला। इसी को अपना भविष्य बनाया और खुद का स्टेडियम बनाकर बच्चों को क्रिकेट सिखा रहा हूं। - विरांत रंजन सिंह
जनपद से एथलेटिक्स के रूप में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2016, 2017 और 2018 में गोल्ड मेडल जीते। वर्ष 2017 में आंध्र प्रदेश में द्वितीय विजेता बने। एथलेटिक्स कोच के रूप में अपने कारवां को आगे बढ़ा रहा हूं। -संदीप
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तैराकी का बहुत शौक था। इसमें कम लोग ही दिलचस्पी रखते हैं। यहां तैराकी के लिए लखनऊ और दिल्ली सहित कई बड़े महानगरों में प्रतिभाग कर मेडल भी प्राप्त किए। अब कोच के रूप में नई पीढ़ी को तैयार कर रहा हूं। - प्रदीप
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तीन वर्ष से लार्ड बुद्धा क्रिकेट अकादमी में कोचिंग कर रहा हूं। पहली बार अंडर-16 क्रिकेट चैंपियनशिप में खेल चुका हूं। में उल्टे हाथ से बल्लेबाजी ओर सीधे हाथ से तेज गेंदबाजी करने करने का अच्छा अनुभव भी रखता हूं। -आदित्य सिंह
बचपन से ही हॉकी खेलने का शौक था, उसे सलीके से खेलना सीखा। डाॅ. आंबेडकर विवि आगरा की ओर से इटावा, कुरुक्षेत्र, अलीगढ़ में मैच खेले। कोयंबतूर में विवि की टीम के कोच और एंपायर के रूप में भूमिका अदा की। -नंदिनी