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Mathura News: छठी पर बृषभान दुलारी के आंगन में गूंजी बधाई

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बरसाना। छह दिन की लाली... आंगन में सजा पालना... और चारों ओर से उठती बधाई की स्वर लहरियां। बरसाने में बृहस्पतिवार को राधारानी की छठी महोत्सव में ऐसा ही भाव नजर आया। लाडली जी मंदिर और बृषभान मंदिर में बृषभान नंदनी की छठी पूजी गई। समाजियों ने जब ‘रंग महल रच्यौ पालना, रानी कीरत कुंवरि झुलावें’ का पद छेड़ा तो मंदिर परिसर बधाई और वात्सल्य के रस में डूब गया। ब्रज की इस प्राचीन परंपरा में गोप-गोपियों के रूप में ब्रजवासी बृषभान दुलारी को मंगल गीतों के साथ आशीष देने पहुंचे।
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भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को बृषभान नंदनी के प्राकट्य के छह दिन बाद छठी पूजन की परंपरा है। मान्यता है कि लाली के जन्म की खुशी में ब्रज के गोप और गोपियां बृषभान जी के महल पहुंचते हैं और मंगल गीत गाकर नवजात राधा को आशीर्वाद देते हैं। इसी परंपरा को जीवंत रखते हुए लाडली जी मंदिर और बृषभान मंदिर में छठी महोत्सव का आयोजन हुआ। सुबह से ही दोनों मंदिरों में बधाई गायन का क्रम शुरू हो गया। समाजियों ने ‘छठी है लली की री, हैली आज पुजावति आरज गोपी री’ पद गाकर छठी पूजन की खुशी मनाई। इसके बाद ‘आजु बधाई है बरसाने, सब लोक बजे सहदाने’ और ‘आजु भैया ब्रजवासी, हम सब तेरे ही हाथ बिकाने’ जैसे पदों ने मंदिर परिसर को बधाई के रंग में रंग दिया।

समाज गायन के दौरान ‘या कन्या के आगे कोटिक बेटों को अगमानें’ पद गूंजा तो बृषभान नंदनी के प्रति ब्रज के वात्सल्य भाव की छवि उभर आई। वहीं ‘रंग महल रच्यौ पालना, रानी कीरत कुंवरि झुलावें’ पद ने छठी के उत्सव को और भावपूर्ण बना दिया। मंदिरों में मौजूद श्रद्धालु भी इन पदों के भाव में डूबे नजर आए। करीब 12 बजे लाडली जी मंदिर और बृषभान मंदिर में छठी पूजन की मुख्य रस्म हुई। बृषभान नंदनी की छठी ब्रज की रीति-रिवाज के अनुसार पूजी गई। अष्टमी के दिन रखा गया सातिया भी पूजन के बाद प्रिया कुंड में प्रवाहित किया गया। छठी पूजन के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराया गया और श्रद्धालुओं को हलुआ प्रसाद वितरित किया गया।
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बीस दिन से चल रही बधाई, छठी पर हुआ समापन

राधाष्टमी के बाद से लाडली जी मंदिर में चल रहे 20 दिवसीय बधाई समाज गायन का भी छठी महोत्सव के साथ समापन हो गया। बीते दिनों मंदिर में राधारानी के प्राकट्य की खुशी में ब्रज के पारंपरिक पदों का गायन होता रहा। छठी के दिन अंतिम बधाई के साथ यह क्रम संपन्न हुआ।
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