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शहीद को नमन करने उमड़ पड़े जवान

Mon, 01 Aug 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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श्रद्धांजलि
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रविवार की शाम दृश्य भावुक कर देने वाला था। देश पर प्राण न्यौछावर करने वाले अपने साथी फरह के लाल बबलू सिंह की अगवानी के लिए सेना के जवान उमड़ पड़े। शाम साढ़े चार बजे सेना के हेलीकाप्टर से शहीद का पार्थिव शरीर यहां पहुंचा। सेना की स्ट्राइक वन कोर के लेफ्टिनेंट जनरल, जवानों और अधिकारियों ने बबलू सिंह के अदम्य साहस और आखिरी सांस तक लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त होने पर सलामी दी। तिरंगे में लिपटे बबलू सिंह के शरीर को देख हर आंख नम थी लेकिन गर्व से हर सीना चौड़ा।
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सेना की 18 जाट रेजिमेंट में सिपाही मथुरा के थाना फरह के गांव झंडीपुर निवासी बबलू सिंह, 30 जुलाई को तड़के जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के नौगाम सेक्टर में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। बताया गया कि बबलू सिंह ने अपने साथियों के साथ जांबाजी से आतंकियों का मुकाबला किया।

गोली लगने से गंभीर रूप से घायल होने पर भी वह पीछे नहीं हटे और गोलियां बरसाते रहे। उन्होंने दो आतंकियों को मार गिराया। अंत में रक्त अधिक बह जाने पर वे निढाल हो गए। साथी सैनिक उनको निकट की चिकित्सा पोस्ट पर ले गए। वहां वे वीरगति को प्राप्त हो गए। 
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बबलू सिंह के पार्थिव शरीर को हेलीकॉप्टर से दिल्ली और उसके बाद मथुरा लाया गया। हेलीपैड के समीप शक्तिद्वार के अंदर हाल में शहीद का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। सेना की स्ट्राइक वन कोर के लेफ्टिनेंट जनरल शौकिन चौहान, डीएम निखिल चंद्र शुक्ला, एसएसपी बबलू कुमार और अन्य अधिकारियों ने शहीद को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

सभी ने बबलू सिंह के परिवार से मुलाकात कर सांत्वना जताई। हेलीपैड पर बबलू के पड़ोसी बालाजीपुरम और चंदनवन के सैकड़ों लोगों ने बबलू को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। हेलीपेड, शक्ति द्वार, सर्कुलर रोड और सैन्य क्षेत्र के हॉल में सैकड़ों सैनिक जुटे रहे।


अंतिम संस्कार की जमीन पर था गतिरोध 
शहीद बबलू सिंह के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार सोमवार को महुअन झंडीपुर रोड पर पंचायत की भूमि पर किया जाएगा। रविवार को इस भूमि के संबंध में कुछ गतिरोध भी सामने आया। भूमि को ग्रामीणों ने जोत रखा था। राजस्व टीम जगह को नापने पहुंची तो कुछ ग्रामीण विरोध में आ गए।

विवाद देख कानूनगो, तहसीलदार और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। हालांकि बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप करने पर मामला सुलझ गया। इधर गांव में शहीद के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए थे। गांव पहुंचने पर पता चला कि सोमवार को अंतिम संस्कार होगा तो लोग वापस चले गए।
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