ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में आश्विन शुक्ल एकादशी के अवसर पर हुई सोहनी सेवा के लिए श्रद्धालुओं में उमड़ पड़े। हाथों में झाड़ू और पोंछा लिए महिला, पुरुष और बच्चों ने मंदिर की सफाई की। कंठी धारण के लिए श्रद्धालुओं ने मंदिर के गर्भगृह और अन्य श्रद्धालुओं ने मुख्य चौक से जगमोहन तक सफाई कर सेवा में योगदान दिया।
जन-जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की तरह उनके लिए होने वाले आयोजन भी निराले हैं। भक्त भी हर भाव में अपने आराध्य की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। ऐसे में वर्ष में दो बार ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में सोहनी सेवा की जाती है। एक आयोजन फाल्गुन शुक्ल एकादशी (होली से पूर्व) और दूसरा शरद पूर्णिमा से पहले आश्विन शुक्ल एकादशी को होता है।
बुधवार को आश्विन शुक्ल एकादशी के अवसर पर दोपहर में राजभोग आरती के बाद पट बंद होने पर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को चंदन महल में विराजित किया गया। चंदन महल के दरवाजे बंद होने के बाद कंठी धारण किए श्रद्धालुओं ने मंदिर के गर्भगृह में सोहनी सेवा की। अन्य श्रद्धालु मंदिर परिसर की सोहनी सेवा में जुट गए। एक बार तो श्रद्धालुओं और मंदिर प्रबंधन के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई लेकिन बाद में मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्थाएं संभालीं।
महिलाएं अपने दुपट्टे से गर्भगृह को साफ करतीं दिखीं वहीं बच्चे हाथों में झाड़ू लेकर मंदिर के जगमोहन की सफाई कर रहे थे। मंदिर प्रबंध की कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी के अनुसार गर्भगृह में कंठी धारण करने वाले श्रद्धालु ही सेवा के अधिकारी हैं। गर्भ गृह में सुबह राजभोग और शाम को शयन भोग आरती के बाद सोहनी सेवा का आयोजन हुआ।