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Mathura News: पंख नहीं तो क्या...हौसलों से भरी उड़ान

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पैरों से लिखता दिव्यांग छात्र। 
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मथुरा। जनपद के परिषदीय विद्यालयों में समेकित शिक्षा योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 में कुल 3118 विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चे शिक्षा ग्रहण कर मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। इन बच्चों के विशेष शिक्षण-प्रशिक्षण व मानसिक संवर्धन के लिए 33 स्पेशल एजुकेटर तैनात हैं, जिनके प्रयासों से कई बच्चे अपनी गंभीर शारीरिक व मानसिक चुनौतियों को पार कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
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परिषदीय स्कूलों में तैनात स्पेशल एजुकेटर्स दिव्यांग बच्चों की जिंदगी संवारने में जुटे हैं। डेटा ट्रैकिंग और ब्लॉकवार मैपिंग के जरिए हर बच्चे की जरूरत पहचानी जा रही है। फिजियो, स्पीच और ऑक्यूपेशनल थेरेपी से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब ये बच्चे सामान्य बच्चों के साथ क्लास में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।


सरकारी योजनाओं से मिल रहा संबल
दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सत्र 2025-26 में व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है। जनपद के 13 विकास खंडों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 408 बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए गए। एलिम्को कानपुर के सहयोग से आयोजित दो मापन व दो वितरण शिविरों में 363 बच्चों को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण वितरित किए गए। वहीं 35 पूर्ण दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल किट तथा 55 अल्प दृष्टि बच्चों को लो-विजन किट दी गई। इसके अतिरिक्त गंभीर दिव्यांगता के कारण स्कूल न आ पाने वाले 152 बच्चों को होम बेस्ड एजुकेशन किट प्रदान कर घर पर ही शिक्षा दी जा रही है।
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आर्थिक सहायता और संसाधन
जिला समन्वयक प्रगति मिश्रा ने बताया कि 356 दिव्यांग छात्राओं को 200 रुपये प्रतिमाह की दर से 10 महीने के लिए कुल 7,12,000 रुपये का स्टाइपेंड डीबीटी से दिया गया। गंभीर रूप से दिव्यांग 197 बच्चों को विद्यालय लाने-ले जाने के लिए 600 रुपये प्रतिमाह की दर से कुल 11,82,000 रुपये एस्कॉर्ट अलाउंस के रूप में दिए गए। बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए 50-50 बच्चों के तीन एक्सपोजर विजिट कराए गए। बच्चों की थेरेपी और काउंसलिंग के लिए गोवर्धन, मांट एवं फरह विकास खंडों में 3 विशेष रिसोर्स रूम स्थापित किए गए हैं। साथ ही अभिभावकों को जागरुक करने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में तीन-तीन पेरेंट्स काउंसलिंग कैंप आयोजित किए गए हैं।

विकास खंड चौमुहां के उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात स्पेशल एजुकेटर ओमशरन के सहयोग से कक्षा 8 के 2 दृष्टिबाधित छात्र लखन और सुमित ने की-बोर्ड पर बिना देखे टाइपिंग करना सीख लिया है। गोवर्धन ब्लॉक के सानौत निवासी पूर्ण दृष्टिबाधित कक्षा 8 के छात्र गौरीशंकर ने पढ़ाई और गायन में प्रतिभा दिखाई है। कक्षा 8वीं पास अस्थि दिव्यांग छात्र अनंत कुमार बिना हाथ के पैरों से सुंदर लेखन करते हैं।


वर्जन
समेकित शिक्षा का उद्देश्य हर दिव्यांग बच्चे को मुख्यधारा से जोड़ना है। स्पेशल एजुकेटर्स और थेरेपी से हमारे नौनिहाल हौसले से अपनी चुनौतियों को हराकर आगे बढ़ रहे हैं। डेटा ट्रैकिंग, विशेष किट और आर्थिक सहायता से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। दिव्यांग बच्चों का नामांकन भी बढ़ा है। - रतन कीर्ति, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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दिव्यांगता की श्रेणीवार स्थिति

दिव्यांगता का प्रकार - छात्र - छात्राएं - कुल योग
इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी - 566 - 371 - 937
लोकोमोटर डिसेबिलिटी - 291 - 208 - 499
स्पेसिफिक लर्निंग डिसेबिलिटी - 308 - 277 - 585
मल्टीपल डिसेबिलिटी - 170 - 72 - 242
स्पीच एंड लैंग्वेज डिसेबिलिटी - 152 - 100 - 252
हियरिंग इम्पेयरमेंट- 115 - 89 - 204
सेरेब्रल पाल्सी - 122 - 48 - 170
लो विजन - 75 - 74 - 149
ब्लाइंडनेस - 27 - 18 - 45
मेंटल इलनेस -14- 5 - 19
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी - 3 - 3 - 6
ड्वार्फिज्म (बौनापन) - 2 - 3 - 5
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर - 3 - 1 - 4
मल्टीपल स्केलेरोसिस - 1 - 1 - 2
हीमोफिलिया - 1 - 0 - 1
एसिड अटैक पीड़ित - 0 - 1 - 1
कुल योग (सभी श्रेणियां) - 1847 - 1271 - 3118
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