करीब 30 साल पहले विकसित की गई महाविद्या कालोनी फेज-दो के पास में जर्जर सीवर टैंक ने मासूम पार्थ की जान ले ली है। इस कालोनी में यह अकेला पार्क नहीं हैं, जहां 30 साल पहले बने सीवर टैंक की हालत अब खस्ता हो चली है। ये टैंक कभी भी किसी और पार्थ की जिंदगी पर भारी पड़ सकते हैं।
पार्कों में खेलते कूदते किसी मासूम को बचाने के लिए अमर उजाला की मुहिम में दर्जनों लोग सारथी बने। हेल्पलाइन पर डीके सक्सेना ने बताया कि इसी कालोनी में भागीरथ बिल्डिंग के निकट बना टैंक जर्जर हो गया है। डा. विनोद दीक्षित का कहना है कि यहां परिक्रमा मार्ग में एलआईजी आवासों के सामने भी ऐसे ही सीवर टैंक की हालत खस्ता हो चली है। गोविंद सिंह ने बताया कि महाविद्या कालोनी फेज-दो के सभी पार्क में यही हालत है। पुराने सीवर टैंक पर ही बच्चे खेलते हैं। इन्हीं पार्कों में बच्चों के लिए झूला लगा दिए गए हैं, जो कभी भी यहां खेलते बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
इस तरह गोरवीश सिकरवार का कहना है कि गोविंद नगर में सीवर लाइन धंसने से हुए गड्डे में आए दिन लोग गिरते हैं। शिकायत करते हुए थक गए हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। राजू गौतम बताते हैं कि नगर पालिका कार्यालय के निकट गली को सीवर के लिए खोदकर छोड़ दिया है। यह भी जानलेवा साबित हो रही है।
सुमन जौहरी ने बताया कि सीवर टैंकों के साथ महाविद्या कालोनी में गहरे नाले और नालियां हैं। उनकी सफाई की फुर्सत किसी को नहीं हैं। सीवर टैंकों की सफाई भी पालिका या विकास प्राधिकरण नहीं कराते हैं।
डीके सक्सेना बोले कि इस दुखद हादसे के बाद अफसरों की नींद खुल जाए तो भी बड़ी राहत मिलेगी। कम से कम अब और कोई पार्थ की जिंदगी तो ऐसे नहीं जाएगी।
विवेक प्रधान के अनुसार कई पार्कों में तो पता ही नहीं है कि यहां सीवर टैंक भी हैं। पुराने होने के कारण उनकी ऊपरी सतह मिट्टी में दब गई है।
जीतू वर्मा बताते हैं कि जब से ये कालोनी बनी है, उसी समय के पार्क यहां मौजूद हैं। उसी वक्त इन पार्कों में कालोनी की सीवर के लिए टैंक बनाए थे। अब इन्हीं पर बच्चे खेल रहे हैं।
लाल की तस्वीर लेकर बिलख रही मां
महाविद्या कालोनी फेस-दो का पार्क सुनसान हो गया है। इस पार्क में खेलने के लिए आने से बच्चे भी कतराने लगे हैं। पूरी कालोनी में मायूसी छाई हुई है। पार्थ की मौत से हर कोई सन्न दिखाई दे रहा है।
घटना के दो दिन बीत गए लेकिन पार्क में अब बच्चों का ऊधम नहीं सुनाई दे रहा है। बच्चे पार्क में जाने से कतराने लगे हैं। हर तरफ मायूसी है। महाविद्या कालोनी फेस-दो के पार्क में मंदिर भी है। दो दिन से इस मंदिर की तरफ कालोनी के किसी व्यक्ति ने रुख नहीं किया है।
न तो मंदिर में पूजा-अर्चना हुई और न ही उसका दरवाजा खोला गया। पार्थ की मां नीतू अस्थाना शनिवार को पूरे दिन हाथ में पार्थ की तस्वीर लेकर रोती-बिलखती रही। तीनों बहनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। दीपावली के बाद आने वाले भैयादूज के पर्व को याद कर बहनों की आंखों में आंसुओं की धारा रुकने का नाम ही नहीं ले रही।
इधर गुरुवार को सीवर टैंक में गिरे ईशा, दिव्येश, नैतिक, सौरभ और शौर्य दहशत के कारण घरों में कैद हैं। हादसे के बाद कोई बच्चा स्कूल नहीं गया। शौर्य के मामा आलोक उपाध्याय का कहना है कि बच्चे दहशत में हैं। सोमवार को स्कूल भेजने का प्रयास किया जाएगा।