मथुरा। डैंपियर नगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में शनिवार को परिवहन विभाग के सहयोग लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस शिविर का आयोजन किया गया। इसमें 100 से अधिक युवतियों और महिलाओं ने लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। जटिल प्रक्रिया आसानी से पूरी होने पर उनके चेहरों पर मुस्कान खिल गई।
सुबह साढ़े 10 बजे से ही शिविर में पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई। संभागीय निरीक्षक नरेश कुमार के नेतृत्व में परिवहन विभाग व जन सेवा केंद्र संचालकों की टीम ने युवतियों और महिलाओं के लर्निंग लाइसेंस की आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कराई। सबसे पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराया गया, इसके बाद ऑनलाइन शुल्क जमा किया गया। दो अलग-अलग काउंटरों पर पंजीकरण की अनुसार यह प्रक्रिया शाम चार बजे तक चली। शिविर में 100 से अधिक लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन कराए गए। आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने पर युवतियों और महिलाओं ने अमर उजाला को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया के चलते अब तक उनका लाइसेंस नहीं बन सका। इससे वाहन चलाने में पर चालान होने का खतरा बना रहता था। अब उनका लाइसेंस बन गया है तो किसी प्रकार की चिंता नहीं होगी।
इस दौरान संभागीय निरीक्षक नरेश कुमार ने ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस केवल ड्राइविंग सीखने के लिए है। इसके एक माह से छह माह के बीच स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए वृंदावन स्थित कार्यालय में संपर्क करना होगा।
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अमर उजाला की पहल से महिलाओं और युवतियों को लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में राहत मिली है। महिलाएं कई बार कार्यालय जाने या अन्य समस्याओं के चलते डीएल बनवाने में देरी करती हैं। इस शिविर में आसानी से आवेदन प्रक्रिया पूर्ण हुई है, अब वह बिना किसी परेशानी के वाहन चलाना सीख सकेंगी।
-नरेश कुमार, संभागीय निरीक्षक
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आवदेकों की बात
सरकारी दफ्तर में तमाम झंझट रहता है। मैंने अखबार में पढ़ा था कि अमर उजाला कार्यालय में लर्निंग लाइसेंस बनवाने के लिए शिविर लगाया जा रहा है। यहां मेरा काम झट से हो गया।
रेनू शर्मा, गृहिणी
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अमर उजाला ने एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिससे बिना किसी सरकारी कार्यालय में गए हमारा काम हो गया। मुझे यहां आकर सुखद एहसास हुआ है। इस पहल से छात्राओं को लाभ मिलेगा।
वैष्णवी, छात्रा
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मेरे पास स्कूटी है, लेकिन लाइसेंस नहीं होने की वजह से मुझे चलाने में डर लगता था। मैं लाइसेंस बनवाना चाहती थी, लेकिन जटिलता के कारण बचती रही। आज डीएल का आवेदन आसानी से हो गया।
कृति, छात्रा
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डीएल बनवाने के लिए शहर के लोगों को वृंदावन स्थित कार्यालय जाना पड़ता है। अमर उजाला कार्यालय में शिविर का आयोजन हुआ तो लोगों को घर के पास ही डीएल बनवाने की सेवा मिल गई।
-रुक्मिणी उपाध्याय, गृहिणी