मथुरा। सराफा बाजार में चांदी के दामों की चपलता से उपजी चमक से हर कोई चकाचौंध है। मथुरा चांदी की देश की बड़ी मंडियों में से एक है। यही कारण है कि यहां बड़े पैमाने पर चांदी की खरीद-फरोख्त का काम किया जाता है। अक्तूबर से सराफा बाजार में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव की शुरुआत हुई। अब चांदी 2 लाख 87 हजार रुपये तक पहुंच गई है। ऐसे में चांदी कारोबार को बड़ा झटका लगा है।
यूं तो चांदी के दाम देशभर में ही चांदी कारोबार प्रभावित हुआ है, लेकिन मथुरा की मंडी में अब चांदी के आसमान पर पहुंचने का असर साफ नजर आने लगा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार करने वाले कई चांदी कारोबारियों को मुनाफा हुआ तो तमाम ऐसे भी हैं, जोकि भारी घाटे में चले गए। उनकी जमा पूंजी भी ज्यादा मुनाफे के चक्कर में डूब चुकी है। वहीं छोटे व्यापारी भी परेशान हैं।
बड़े कारोबारियों के भुगतान बाजार में अटके पड़े हैं, लेकिन पैसा नहीं मिल पा रहा है। बाहर के बाजारों में भी चांदी फंसी हुई है, लेकिन कारोबार तो जारी रखना है। ऐसे में भरोसे का संकट भी पैदा हो गया है। किस पर कैसे भरोसा करें। कोई चांदी लेकर चंपत तो नहीं हो जाएगा। इससे भी कारोबारी पशोपेश में हैं। सोच समझकर ही निवेश कर रहे हैं। चांदी कारोबारी मयंक अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल आदि का कहना है कि बाजार में चांदी का काम सिमटकर 10 फीसदी ही रह गया है। चांदी के भाव इसी तरह रहे तो तीन लाख रुपये प्रति किलो को भी पार कर सकते हैं। ऐसे में चांदी में निवेश करने वाले भी अब बहुत सोच समझकर निवेश कर रहे हैं। इस ऊहापोह ने बाजार की चाल ही बदल दी है। कारोबारियों का मानना है कि सराफा बाजार में लंबे समय बाद ऐसा माहौल पैदा हुआ है, जबकि कारोबार करने से पहले दस बार सोच विचार करना पड़ रहा है।