वृंदावन के ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में ठाकुरजी को ठंड का अहसास होने लगा है। शीत ऋतु से बचाव के लिए चांदी की अंगीठी, जयपुरी रजाई, हाथों और चरणों में ऊनी मोजे धारण कराए जाने लगे हैं। ठाकुरजी के प्रसाद में भी बड़ा बदलाव किया गया है। व्यंजनों में केसर, मेवाओं को समावेश किया गया है।
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ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में सेवायत गोस्वामियों ने ठाकुरजी की पोशाक और भोग प्रसाद में बदलाव किया है। व्यंजन द्वादशी से ठाकुरजी को अधिक ठंड का अहसास होने लगता है। सेवायत गोस्वामी ने ठाकुरजी के सम्मुख सुबह शृंगार आरती, राजभोग आरती और शाम को संध्या व शयन आरती तक चांदी की अंगीठी की सेवा शुरू की है।
वहीं जयपुरी रजाई एवं हाथों एवं चरणों में मखमली एवं ऊनी मोजे धारण कराए जा रहे हैं। ठाकुरजी को दूध एवं खीर में केसर और मेवा को शामिल किया जाने लगा है। मंदिर की रसोई में सेवायत ठाकुरजी के लिए तिल एवं मेवाओं के लड्डू, हलवा और खीर बना रहे हैं। सेवायत मोहित मराल गोस्वामी ने बताया कि सुबह और शाम श्रीजी के समक्ष अंगीठी की सेवा बसंत पंचमी तक निरंतर की जाएगी।