मथुरा। छाता-शेरगढ़ रोड पर स्थित एलाइंस डिस्टलरी में एथेनॉल उत्पादन के लिए 1500 मीट्रिक टन अतिरिक्त चावल आवंटन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि डिस्टलरी को एथेनॉल उत्पादन का कितना लक्ष्य दिया गया था, इस संबंध में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है, जबकि एथेनॉल निर्माण प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी आबकारी विभाग के पास थी।
बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि डिस्टलरी को एथेनॉल उत्पादन का निर्धारित लक्ष्य कितना था और उसे लक्ष्य के सापेक्ष 1500 मीट्रिक टन अतिरिक्त चावल आवंटित किया गया। चावल आवंटन की प्रक्रिया उच्च स्तर पर तय होती है। ऐसे में जांच में शामिल जिलास्तरीय अधिकारी इस मुद्दे पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। हालांकि आशंका है कि केवल मथुरा स्थित एलाइंस डिस्टलरी को ही अतिरिक्त चावल नहीं दिया जा रहा है, बल्कि प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन करने वाली अन्य डिस्टलरियों को भी जरूरत से अधिक चावल आवंटित किया जा रहा हो। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त चावल की कालाबाजारी या दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए जांच रिपोर्ट में केवल एक डिस्टलरी तक जांच सीमित रखने के बजाय प्रदेश की सभी एथेनॉल डिस्टलरियों की सीबीआई से व्यापक जांच कराने की सिफारिश की गई है। यदि यह सिफारिश अमल में आई तो एथेनॉल उत्पादन, चावल आवंटन और वितरण व्यवस्था से जुड़े कई अहम तथ्यों का खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल अधिकारी इस पूरे मामले पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। एडीएम नमामि गंगे नंद प्रकाश मौर्य ने बताया कि डिस्टलरी में एथेनाल बनाने के लिए भेजे जा रहे अनुदानित चावल की कालाबाजारी की जा रही थी। इसकी जांच पूर्ण हो चुकी है। जल्दी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।