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Mathura News: मां को डूबता देख बेहोश हो गया था श्वेत जैन

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वृंदावन। यमुना में मोटरबोट डूबने पर लोगों ने जीवन और मौत के बीच काफी संघर्ष किया। मौत के मुहं से निकलकर आए पंजाब के लुधियाना निवासी 32 वर्षीय युवा श्रद्धालु श्वेत जैन ने बताया कि एक तरफ मौत दिखाई दे रही थी वहीं दूसरी ओर डूब रहे लोग एक-दूसरे को पकड़कर ऊपर आने की जद्दोजहद कर रहे थे। वह जैसे ही नदी के गहरे पानी से ऊपर आए तो मां को डूबता देख बेहोश हो गए। उनकी आंखों में डर अभी तक बसा हुआ है। इससे उनकी नींद भी उड़ गई है।
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जगरांव के अगवार ख्याजा बाजू निवासी श्वेत जैन ने पिछले दो दिनों से रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती थे। हालत सामान्य होने पर रविवार दोपहर उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गई। उनकी मां 55 वर्षीय रेखा जैन अभी भी आईसीयू में है। श्वेत जैन मोटरबोट डूबने की घटना को याद करते हैं तो उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बताया कि उन्हें नींद भी नहीं आ रही है। आंखें बंद करते ही सीन सामने आने लगता है।
उन्होंने बताया कि जैसे ही उनकी मोटरबोट नदी में डूबी, उसमें बैठे सभी लोग गहरे पानी में चले गए। उनमें वह और उनकी मां रेखा भी थीं। वह हाथ-पैर चलाते हुए पानी से ऊपर आए तो देखा कि लोग अपने बचाव में एक-दूसरे को खींच रहे हैं। जैसे ही वह गहराई से ऊपर आने लगे तभी उनके दोनों पैर डूब रहे लोगों ने पकड़कर खींच लिए, जिससे वह फिर यमुना के गहरे पानी में चले गए।
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लोगों से बचते हुए मुश्किल से दूसरी बार वह ऊपर आए तो देखा कि उनकी मां भी नदी में डूब रही हैं। उन्हें दो लोग खींच रहे हैं। इसे देख वह फिर बेहोश हो गए। इसके बाद उन्हें नहीं पता कि अस्पताल कौन लाया और वह कैसे आए। श्वेत जैन ने बताया वह और उनकी मां रेखा जैन तीन दिन के लिए वृंदावन आए थे। जीवन बहुत ही मुश्किल से बचा है। यह बांकेबिहारी की ही कृपा है।
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