मथुरा का हर स्थल भगवान कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। गांव बछगांव भी। भगवान श्रीकृष्ण यहां की हरियाली और वातावरण देख अपनी कुछ गायों के बछड़ों को ग्वाल-वालों के साथ छोड़ आए थे। इसी मान्यता के आधार पर ये स्थल बछड़वन गांव और अब बछगांव कहा जाने लगा है।
क्षेत्र में हरियाली के चलते राजा अपनी सेनाओं का यहां ठहराव रखते थे। यहां विश्राम के लिए कुआं और तालाब का भी तत्कालीन राजाओं ने निर्माण कराया था। वर्तमान में ये बदहाल हालत में हैं। इनका आकार भी अब सिमट गया है। यहां तालाब पशु-पक्षियों के लिए पीने के लिए पानी का सहारा थे।
ग्रामीण कुंवर बलजीत सिंह बताते हैं कि यहां बने तालाब, पोखरों को बचाने की कोई पहल प्रशासनिक स्तर पर नहीं की गई है। लक्ष्मन सिंह, राजवीर सिंह, प्रेमसिंह, वेदवीर सिंह, सुरेश सिंह, छिद्दी सिंह, बाबूलाल, भूरासिंह, बच्चू सिंह, सीतारात हवलदार, फतेह सिंह, राजेन्द्र सिंह आदि ने गांव के इतिहास की जानकारी दी।
गांव की समस्याएं
- पीने के पानी की गंभीर समस्या है
- तालाब और पोखरों की स्थिति खराब
- रजबहा और माइनरों की सफाई नहीं
- गांव में पानी की टंकी शोपीस बनी
- हैंडपंप ज्यादातर पड़े हैं खराब