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केपीएस गिल ने वृंदावन में लड़ी टीबी से लड़ाई

Fri, 26 May 2017 11:58 PM IST
राजीव अग्रवाल (वृंदावन)।
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को गोविंद गोधाम गोशाला के लोकार्पण समारोह में मंचासीन केपीएस गिल। (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
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पंजाब में आतंकवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक केपीएस गिल ने वृंदावन में भी एक बड़ी लड़ाई लड़ी। यह लड़ाई थी टीबी की बीमारी से। ब्रज क्षेत्र को क्षय रोग से बचाने के लिए प्रोजेक्ट बलराम शुरू करने वाले गिल का वृंदावन से आत्मीय नाता रहा है। वह ब्रजभूमि की सेवा कर अपनी अमिट छाप छोड़ गए हैं।  राधारमण मंदिर के सेवायत पद्मनाभ गोस्वामी ने अमर उजाला को बताया कि सेवानिवृत्त होने के बाद 1998 से ही केपीएस गिल वृंदावन आने-जाने लगे थे। शुरूआत में कई वर्षों तक इस्कान के एमवीटी गेस्ट हाउस में आकर ठहरते थे। 2007 में उन्होंने केशीघाट स्थित लक्ष्मीरानी कुंज को खरीदकर अपना स्थायी आवास बना लिया। लक्ष्मीरानी कुंज में उन्होंने पीड़ित मानवता की सेवा के लिए अपने खर्चे पर एक धर्मार्थ अस्पताल का संचालन भी शुरू किया। अस्पताल में गरीबों को नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श एवं दवाइयां देने का कार्य वर्तमान में भी चल रहा है। गिल ने वर्ष 2002 में वृंदावन में बलराम प्रोजेक्ट की शुरुआत की। इस योजना में एक चिकित्सा मोबाइल वैन ब्रज के गांव- गांव जाती। लोगों को क्षयरोग से मुक्ति दिलाने के लिए नि:शुल्क दवाइयां बांटी जातीं। हजारों लोग इससे लाभांवित हुए। गोवंश व अन्य जीवजंतुओं की सेवा में भी पूर्व डीजीपी का योगदान रहा। कई साल से केपीएस गिल की सुरक्षा में तैनात रहे ब्रजानंद यादव ने बताया कि साहब (पूर्व डीजीपी गिल) ने अमेरिकन महिला मित्र चांडी माताजी के साथ मिलकर यहां जनसेवा की। लोगों को स्वास्थ्य लाभ देने के कई कार्य किये। वृंदावन प्रवास के दौरान वह नगर के सामाजिक, धार्मिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यक्रमों में भी आते-जाते थे। पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था। इस कारण वह अपने परिवार के साथ दिल्ली रहने लगे। वृंदावन की याद उन्हें वहां भी सताती रही।


 
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