मथुरा। अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य, बुराई पर अच्छाई पर जीत के लिए भगवान श्रीराम आज अहंकारी रावण का अंत करेंगे। उस रावण का अंत तो हर साल प्रतीकात्मक रूप से हो रहा है। मगर, वर्तमान समय की समस्याएं- टूटी सड़कें, जलभराव, गंदगी, जाम, दूषित यमुना जल, पेयजल समस्या, अपराध, बंदर-कुत्ते, खराब स्वास्थ्य सेवा, बदहाल शिक्षा व्यवस्था आज रावण रूपी हो गई हैं। आखिर उनका अंत कब होगा। जब इस रावण का अंत होगा तभी समाज को एक नया आयाम और नीति तथा विकास का रास्ता मिलेगा।
1. टूटी सड़कें: शहर की खस्ताहाल सड़कों से ब्रजवासियों को मुक्ति दिलाने के लिए सूबे के मुखिया के साथ मंडलायुक्त भी स्थानीय अधिकारियों को निर्देशित कर चुकी हैं, लेकिन स्थानीय अधिकारी अभी तक लोगों को मुक्ति नहीं मिल सकी है। शहर की कोई भी सड़क ऐसी नहीं है जो कि गड्डा मुक्त हों।
2. जलभरावः हल्की सी बारिश ही लोगों ब्रजवासियों को परेशान कर देती है। लगातार यदि 10 मिनट भी पानी पड़ जाए तो शहर का हृदय स्थल होलीगेट और उसके अंदर का पूरा हिस्सा जलभराव की चपेट में आ जाता है। इतना ही नहीं शहर के पुराने और नए बस अड्डे से नीचे से तो निकलना दुश्वार हो जाता है। कई बार इन अंडरपास के नीचे रोडवेज के साथ स्कूली बसें तक फंस चुकी हैं। भूतेश्वर पर बने अंडरपास के नीचे जलभराव में गिरकर कई बार लोग चुटैल हो चुके हैं।
3. गंदगी: भले ही मथुरा नगर निगम में तब्दील हो गया है, लेकिन गंदगी से उसे छुटकारा नहीं मिला है। शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। अमरनाथ स्कूल से जन्मभूमि जाने वाले रास्ता के साथ आर्य समाज रोड का तो इतना बुरा हाल है कि यहां से गुजरना दुश्वार हो जाता है।
4. जाम: जाम की समस्या तो जैसे शहर वासियों के लिए नासूर बनती जा रही है। पुलिस ने कई बार ट्रेफिक प्लान बनाकर लोगों को जाम से मुक्ति दिलाने का प्रयास किया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। अब तो हालात यह हो गए हैं कि मथुरा-वृंदावन मंदिरों की नगरी के साथ ही जाम के लिए दूसरे शहरों में ख्याति पा रहा है।
5. दूषित यमुना जल: जमुना को शुद्ध करने का दंभ भरने वाली राजनीतिक पार्टियां यमुना को केवल चुनावी मुद्दा बनाकर रखना चाहती है। चुनाव कोई भी हो, सभी प्रत्याशी सबसे पहले यमुना को प्रदूषण मुक्त करने का दावा करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह प्रत्याशी यमुना आचमन तक करने से गुरेज करने लग जाते हैं। यमुना की शुद्धिकरण के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार का लाखों रुपये के प्रोजेक्ट भी सफल नहीं हो पाए हैं।
6. पेयजल समस्या: खारे पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों को सरकार गंगाजल का पिलाने का सपना तो दिखा चुकी है, लेकिन अभी तक गंगाजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। पुराने शहर के साथ ही बाहर के इलाकों में अभी तक पाइप लाइन तक नहीं डाली गई है। मथुरा की सांसद हेमा मालिनी दो बार खारे पानी से निजात दिलाने का वादा करते हुए चुनाव जीत गई। उन्होंने कुछ स्थानों पर पानी के एटीएम भी लगाए, लेकिन वह एटीएम सफेद हाथी बने हुए हैं।
7. अपराध: धार्मिक नगरी होने के कारण यहां अपराधों का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा है। पुलिस लाख प्रयास करें, लेकिन अपराधों के ग्राफ को कम करने में कामयाब नहीं हो पा रही है। हत्या, लूट, डकैती जैसे कई मामले ऐसे हैं जिनका खुलासा करने में पुलिस को कामयाबी नहीं मिल पाई है। जिले में नशे के व्यापारियों की संख्या पर भी पुलिस लगाम नहीं लगा पा रही है।
8. बंदर-कुत्ता: खूंखार हुए बंदर और कुत्ते नई समस्या बनकर सामने आए हैं। शहर के लोगों को बंदरों के कारण अपने घरों को पिजरें में तब्दील करना पड़ा है। बंदरों से नगर निगम के अधिकारी निजात नहीं दिला सके, अब उनके सामने खूंखार कुत्ते की समस्या और उत्पन्न हो गई है। मथुरा-वृंदावन को नगर निगम बने हुए छह साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक नगर निगम में आवारा कुत्ता पकड़ने वाली सेल तक तैयार नहीं हुई है।
9. खराब स्वास्थ्य सेवा: जनपद की खराब स्वास्थ्य सेवाएं किसी से छिपी नहीं है। जिला अस्पताल मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करने के लिए पहचान बना चुका है। कई बीमारियों के चिकित्सक तक जिला अस्पताल में नहीं है। इसके साथ ही यदि कोई गंभीर दुर्घटना का केस आ जाए तो चिकित्सकों के हाथ-पैर फूल जाते हैं और वह उसे आगरा, दिल्ली रेफर करने की सलाह परिजनों को देकर अपना पिंड छुड़ा लेते हैं।
10. बदहाल शिक्षा व्यवस्था: प्रदेश सरकार ने कायाकल्प के तहत बेसिक स्कूलों को सुधारने का बीड़ा उठाया है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण योजना कायाकल्प परवान नहीं चढ़ पा रही है। बेसिक स्कूलों में बच्चों के बैठने तक के लिए कुर्सी-मेज तक नहीं है। कई स्कूल तो ऐसे हैं जहां बच्चों को अंधेरे में पढ़ना पड़ रहा है।
शस्त्र पूजन के नाम पर रंगबाजी की तो जाएंगे जेल
मथुरा। विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजन की परंपरा व बीते वर्षों में इस परंपरा के नाम पर शस्त्र धारकों द्वारा फायरिंग करने की घटनाओं को देखते हुए जिला पुलिस व प्रशासन इस बार अलर्ट हो गया है। एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने सभी थानाध्यक्षों को निर्देश जारी किए हैं कि जिन-जिन स्थानों पर सामूहिक रूप से शस्त्र पूजन का आयोजन किया जाता है, वहां पर कड़ी निगरानी की जाए। कोई भी शस्त्र धारक पूजन के बाद फायरिंग न करने पाए। डीएम स्तर से क्षेत्रीय मजिस्ट्रेटों और एसडीएम को अलर्ट करते हुए उन्हें भी निगरानी करने का आदेश जारी किया है। एसएसपी ने साफ तौर पर कहा कि कहीं भी शस्त्र पूजन के बाद फायरिंग की घटना प्रकाश में आई तो संबंधित शस्त्र धारक का लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। संवाद
रामलीला मैदान पर पुलिस की निगरानी में होगा पुतला दहन
रामलीला मैदान में आज रावण का पुतला दहन होगा। पुलिस ने यहां सुरक्षा व्यवस्था की पूरी तैयारी कर ली है। सोमवार को एसएसपी के निर्देश पर अधिकारियों की यहां पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा भी लिया। एसएसपी के अनुसार रामलीला मैदान पर पुतला दहन के समय लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।