मानमंदिर सेवा संस्थान की ओर से संचालित श्रीराधारानी ब्रजयात्रा अपने पांचवें दिन के पड़ाव स्थल कन्हैया के गांव नंदगांव पहुंची। इंद्रदेव द्वारा रात भर ली गई कड़ी परीक्षा के बाद भी श्रद्धालुओं के कदम तनिक भी नहीं डगमगाए। कन्हैया को ऊर्जा प्रदान करने वाले राधे नाम के सहारे ब्रजयात्री आंधी तूफान की चिंता किए बिना आगे बढ़ते रहे।
डेढ़ घंटे की देरी से ब्रजयात्रा नंदगांव पहुंची। नंदगांव में प्रवेश करते ही यात्रा का श्रीकृष्णा पब्लिक स्कूल पर बच्चों ने स्वागत किया। राधाकांत शास्त्री ने बच्चों से भोजन करने से पहले हाथ जोड़ कर राधा-कृष्ण नाम स्मरण की अपील की।
तनिक आगे बढ़ते ही बरसाना रोड पर पहले से इंतजार में खड़े रमेश चंद गोस्वामी, उमेश गोस्वामी, सुशील, गोकुलेश आदि ने यात्रा का नेतृत्व कर रहे रामजीलाल शास्त्री का माला पहना कर स्वागत किया। नंदगांव प्रवेश के बाद यात्रियों ने जगह-जगह विश्राम कर पुन: यात्रा आरंभ की। गुरुवार को लौधौली, आंजनौंख, संकेत, विह्वल कुंड, श्यामकुंड, राधारमणजी होते हुए ब्रजयात्रा पड़ाव स्थल पर पहुंची।
आज नंदगांव भ्रमण करेंगे यात्री
यात्रा के छठे दिन यात्री नंदगांव भ्रमण करेंगे। इस दौरान परिक्रमा मार्ग, यशोदा कुंड, नंद खिरक, चरण पहाड़ी, पनिहारी कुंड, वृंदा कुंड, मोती कुंड, पावन सरोवर आदि स्थलों के दर्शन करेंगे।
नंदगांव-बरसाना के ग्वालों के मध्य हासपरिहास आज
शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात बजे यात्रा नंदभवन पहुंचेगी। इस दौरान रमेश बाबा भी मौजूद रहेंगे। नंदगांव-बरसाना के लोगों के मध्य हास-परिहास का आयोजन भी हर वर्ष की तरह किया जाएगा।
शास्त्रीय संगीत पर आधारित होता है संकीर्तन
ब्रजयात्रा में बोला जाने वाला संकीर्तन भी शास्त्रीय संगीत पर आधारित होता है। यात्रा काल में अखंड हरिनाम संकीर्तन का आयोजन होता रहता है। सुबह छह से 12 बजे तक होने वाला कीर्तन पूर्णत: शास्त्रीय संगीत पर आधारित होता है। युगल मंत्र संकीर्तन की धुन भी बाबा ने ही तैयार की है।
यात्रियों के पंडाल में पहुंचने के बाद संगीत के जानकार वाद्य यंत्रों के साथ कीर्तन करते हैं। एक-एक घंटे की इनकी कई टोलियां बनाई गई हैं। इसमें बंगाल, बिहार, उड़ीसा, गुजरात, पंजाब आदि प्रांतों के लोग होते हैं। संध्या के समय स्थानीय लोग ठाकुरजी की लीलाओं का गायन करते हैं। रात में आठ से 12 बजे तक मानमंदिर के कार्यकर्ता विशेष मानमंदिर का कीर्तन करते हैं। संध्या को पांच बजे रमेश बाबा दैनिक सत्संग में लीलास्थलों के महत्व का वर्णन करते हैं।
पड़ाव स्थल पर हर रोज बसता है नया मानमंदिर
मानमंदिर की ओर से संचालित ब्रजयात्रा का प्रबंधन भी गजब है। हर रोज पड़ाव स्थल पर नया मानमंदिर यात्रियों के पहुंचने से पहले ही तैयार हो जाता है। पड़ाव स्थल पर मानमंदिर जैसी व्यवस्थाओं को देख यात्री आराम महसूस करते हैं। टैंट लगाने में गहवरवन जैसा ही नक्शा दिया जाता है।
मानमंदिर, रसकुंज, गुरुकुल, रसमंदिर, चिकित्सालय, कार्यालय, मार्केट आदि के लिए अलग-अलग टैंट लगाए जाते हैं। मानमंदिर नामक टैंट में गहवरवन की भांति ठाकुरजी के साथ-साथ साधु-संतों और पुजारियों का निवास रहता है। रसकुंज में मानमंदिर की बालिकाएं रहती हैं।
गुरुकुल में बाल विद्यार्थी गुरुकुल की भांति यात्रा में भी अध्ययन करते हैं। रसमंदिर को अतिथियों और कर्मचारियों के लिए बनाया जाता है। यात्रियों की सुविधा के लिए चिकित्सालय और मार्केट को भी अलग स्थान दिया जाता है। दो घंटे सुबह और दो घंटे शाम को बाजार गुलजार रहता है।