राधाकुंड श्यामकुंड गिरि गोवर्धन, मौधुर मौधुर वंशी बाजै एई तो वृंदावन... कुछ ऐसी ही छटा शीतकालीन निकुंज सेवा महोत्सव में शनिवार को छाई दिखी। ठाकुर राधारमण लाल ने भक्तों को मंदिर में सजी राधाकुंड श्यामकुंड के मिलन स्थल की झांकी में विराजित होकर दर्शन दिए।
श्रद्धालु अपने आराध्य की इस अद्भुत झांकी को अपलक निहारते रहे। राधाकुंड श्यामकुंड की जड़ावदार अटरियां, ऊपर बने प्राचीन शैली के तोड़े और कुंड की झांकी आकर्षण बनी हुई थीं। इसके मध्य ठाकुर राधारमण ने सफेद पोशाक धारण कर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। पट खुलते ही संपूर्ण मंदिर परिसर ठाकुर राधारमण लाल के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। राग सेवा तरूण दास ने की और आगंतुकों का स्वागत सेवायत वेणुगोपाल गोस्वामी, अभिनव गोस्वामी ने किया। शयन आरती सुवर्ण गोस्वामी ने की।
इससे पहले प्रात:काल पंडितों ने भागवतजी का मूलपाठ किया और डा. अच्युतलाल भट्ट चैतन्य ने भागवत कथा का श्रवण कराया। राधाकुंड श्यामकुंड की झांकी का महत्व बताते हुए सेवायत आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि यह शीतलकालीन निकुंज सेवा महोत्सव चैतन्य महाप्रभु को समर्पित है, क्योंकि चैतन्य महाप्रभु आज से 499 वर्ष पहले वृंदावन पधारे।
उनके 500वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में झांकियां सजाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि चैतन्य महाप्रभु भावरूप में ठाकुर राधारमण लाल को ब्रज का भ्रमण कराने के लिए निकले हैं। आज उन्होंने राधाकुंड श्यामकुंड के मिलन स्थल पर ठाकुर राधारमण लाल को विराजित किया।