नगर के मंदिरों और आश्रमों में शरद महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। तैयारियाें को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मुख्य आयोजन 15 अक्तूबर को होंगे।
विश्वविख्यात ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में 15 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा महोत्सव के दिन ठाकुरजी मोर, मुकुट, कटि काछनी के साथ ही श्वेत वस्त्रों में वंशी धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर प्रबंधक मुनीष शर्मा के अनुसार पूर्णिमा पर भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासक मथुरा मुंसिफ के आदेशानुसार दर्शनों के समय में परिवर्तन किया गया है।
भक्तों की भावनाओं के दृष्टिगत सुबह राजभोग आरती के समय में एक घंटा और शयन भोग आरती के भी समय में एक घंटे की बढ़ोत्तरी की गई है। राजभोग आरती दोपहर 12 बजे के स्थान पर 12.55 बजे और देर शाम शयन भोग आरती 9:30 बजे के स्थान पर रात्रि 10:25 बजे होगी।
ठाकुर राधावल्लभ मंदिर में शरद पूर्णिमा 15 अक्तूबर को मनाई जाएगी। ठाकुरजी श्वेत वस्त्र धारण करेंगे। नगरसप्त देवालयों में 15 अक्तूबर को आयोजन होंगे। रंगनाथ मंदिर में शरद पूर्णिमा पर शाम सात बजे से चंदप्रभा की झांकी में विराजमान होकर रंगजी महाराज भक्तों को दर्शन देंगे। ठाकुर राधासनेह बिहारी मंदिर में राधासनेह बिहारी महाराज मोर, मुकुट , कटि, काछिनी वंशी के साथ श्वेत वस्त्र धारण करेंगे।
खीर और चंद्रकला का लगता है भोग
शरद पूर्णिमा के बारे में आचार्य मनीष शुक्ला ने बताया कि शरद कालीन पूर्णिमा में ही भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन यमुना तट स्थित वंशीवट पर गोपियों संग (एक-एक गोपी, एक-एक कृष्ण के रूप में) महारास किया था। तीनों लोकों को कृतार्थ कर देने वाले महारास को देखने की तीव्र लालसा देवाधिदेव शिव के हृदय में जागी। रात्रि की अद्भुत छटा का साक्षात्कार करने को उन्होंने गोपी वेश धरा और गोपीश्वर कहलाए। ठाकुरजी को शरद पूर्णिमा के विशेष प्रसाद के रूप में खीर और चंद्रकला अर्पित की जाती है। नगर के कई अन्य आश्रमों और मंदिरों में महारास आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।