मथुरा। शहीद हेमराज की शहादत के बाद खुद को आर्मी हेडक्वार्टर का अधिकारी बताकर शहीद की पत्नी से दस लाख रुपये की ठगी करने के आरोपी हरेंद्र को अदालत ने छह साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर डेढ़ लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।
गांव शेरनगर निवासी हेमराज आठ जनवरी 2013 को जम्मू में पाकिस्तान के सैनिकों से लड़ते-लड़ते शहीद हो गए थे। पाकिस्तानी सैनिकों ने उनका सिर काट लिया था। इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया था। हेमराज का परिवार इस गम से उभर भी नहीं पाया था कि पांच अप्रैल 2013 को उनके साथ धोखाधड़ी की घटना हो गई थी। आर्मी अफसर की वर्दी पहने एक व्यक्ति उनके गांव शेरनगर पहुंचा और अपना नाम अमित बताते हुए कहा कि वह आर्मी हेडक्वार्टर से आया है।
उसने हेमराज की पत्नी धर्मवती से मिलने की बात कही। परिवार वालों ने उसे मिलवा दिया तो उसने बताया कि जो सहायता राशि मिली है, उनकी बच्चों के नाम पर एफडी करा दो। धर्मवती उसकी बात पर भरोसा कर उसके साथ स्टेट बैंक छाता पर गईं। इसी दौरान धर्मवती के चचिया ससुर गजेंद्र और देवर भगवान सिंह भी पहुंच गए। उसने धर्मवती से 10 लाख रुपये निकलवाए और कहा कि बुखरारी कोसी की बैंक में एफडी कराएंगे।
नकदी भरा बैग युवक ने अपने पास रख लिया और धर्मवती को बाइक पर बैठा लिया। कोसी बाईपास पर उसने शहीद की पत्नी को उतारते हुए कहा कि बाइक में तेल डलवाकर आता हैं, इसके बाद वह फरार हो गया था।
इस मामले का कोसीकलां में मुकदमा दर्ज कराया गया। 20 जून को पुलिस ने आरोपी हरेंद्र सिंह निवासी ब्योंही थाना राया को गिरफ्तार कर लिया था। उसके कब्जे से तीन लाख रुपये, कार और बाइक भी बरामद हुई। हाईकोर्ट से भी उसकी जमानत खारिज हो गई थी।
मामला एसीजेएम प्रथम राधेमोहन श्रीवास्तव की अदालत में चल रहा था। मुकदमे के दौरान अभियोजन की तरफ से अनार सिंह और सतेंद्र पाल सिंह ने दलीलें पेश कीं। अदालत ने मामले में हरेंद्र सिंह को दोषी पाया और उसे छह साल के कारावास और डेढ़ लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है।