ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को मंदिर परिसर में कुर्सी-मेज लगाकर भोजन कराने वाले सेवायातों पर मंदिर प्रबंध कमेटी ने 7.5 लाख का जुर्माना लगा दिया है। मंदिर कमेटी की मंगलवार रात हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।
कमेटी ने फैसला लिया कि सेवायतों ने अधिकारियों को मंदिर प्रांगण में भोजन कराकर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की है। साथ ही निर्णय लिया गया कि सात दिन के भीतर जुर्माना न देने की स्थिति में दोनों सेवायतों को मंदिर से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा। मुख्य सचिव यहां 30 जून को दौरे पर आए थे।
मंगलवार की शाम नियत समय से लगभग एक घंटे विलंब से प्रबंध समिति की बैठक रात्रि 8 बजे शुरू हुई। बैठक में कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु, उपाध्यक्ष घनश्याम गोस्वामी, सदस्य रजत गोस्वामी, ब्रजेश गोस्वामी, गौरव गोस्वामी, विकास वार्ष्णेय और जय प्रकाश शर्मा के अलावा मंदिर के प्रबंधक मुनीष शर्मा मौजूद रहे।
प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु ने बैठक समाप्त होने के बाद बताया कि सेवायत आनंद किशोर गोस्वामी और जुगल किशोर गोस्वामी को न्यायालय के आदेश की अवहेलना का दोषी पाया गया है। उन्हें सात दिन के अंदर साढ़े सात लाख रुपये जुर्माना अदा करना होगा। तय समय पर जुर्माना न देने की स्थिति में मंदिर से मिलने वाली सुविधाएं दोनों सेवायतों के लिए बंद कर दी जाएंगी।
ये था मामला
30 जून मंगलवार को वृंदावन और मथुरा दौरे पर आए मुख्य सचिव आलोक रंजन, डीएम राजेश कुमार आदि अफसरों के लिए मंदिर के सेवायत आनंद किशोर गोस्वामी, जुगल किशोर गोस्वामी की तरफ से भोजन की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए मंदिर के सेवायत ने मंदिर की परंपरा और कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए गेट नंबर दो से मंदिर के प्रवेश मार्ग पर मंदिर परिसर में ही कुर्सी और मेज लगवा दिए।
इसके बाद कुछ अधिकारियों को कुर्सी और मेज पर बैठाया गया जबकि कुछ अधिकारियों और श्रद्धालुओं के जमीन पर बैठने की व्यवस्था की गई। मंदिर के गेट नंबर दो पर लगे सीसीटीवी फुटेज में डीएम, एसएसपी, एसपी सिटी के साथ अन्य अधिकारी भोजन करते कैद हो गए। मामला मीडिया में उजागर होने के बाद प्रबंध कमेटी ने सेवायतों को नोटिस थमाते हुए जवाब मांगा था। जवाब आने के बाद कमेटी की बैठक में जुर्माने का अहम फैसला ले लिया गया।
इस वर्ष कई सेवायतों पर लग चुका है जुर्माना
- 20 जनवरी को शयनभोग के सेवायत सुमित गोस्वामी ने शाम 5:10 से 5:15 बजे तक मंदिर के जगमोहन में लगे कठघरे के अंदर से सात श्रद्धालुओं को दर्शन कराए। मंदिर प्रबंधन ने सेवायत को नोटिस जारी कर 20 हजार रुपये प्रत्येक श्रद्धालु के हिसाब से 1, 40,000 रुपये का दंड लगाया। सात दिन में सेवायत ने दंड की रकम जमा नहीं की तो सेवायत को मंदिर की ओर से मिलने वाली सुविधाएं जैसे बच्चों की शिक्षा, मुंडन संस्कार, विवाह, जनेऊ, वृद्धा पेंशन आदि पर रोक लगा दी गई थी।
-शयन भोग सेवाधिकारी मोहन बिहारी गोस्वामी को अपनी सेवा के दौरान एक, तीन और नौ जनवरी को 12 दर्शनार्थियों को जगमोहन में लगे कठघरे से दर्शन कराने पर 20 हजार रुपये प्रति व्यक्ति की दर से 2,40,000 रुपये दंड लगाया गया।
-राजभोग के सेवाधिकारी विशाल गोस्वामी और गौरव गोस्वामी पर 6,7,11 और 16 जनवरी के बीच सेवा के दौरान छह दर्शनार्थियों को जगमोहन के कठघरे से दर्शन कराने पर 1,20,000 का दंड लगाया गया।
आठ नवंबर को जगमोहन में कराए थे भोजन
आठ नवंबर 2014 को बांकेबिहारी मंदिर के एक सेवायत ने दोपहर के समय निज मंदिर के बाहर जगमोहन में बैठाकर श्रद्धालुओं को भोजन कराया। इससे मंदिर प्रबंधन पूरी तरह अनभिज्ञ बना रहा। मामला चर्चा में आने के बाद बांकेबिहारी मंदिर प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष नंदकिशोर उपमन्यु ने जांच कराने की बात कही, लेकिन 15 नवंबर को राष्ट्रपति के बांकेबिहारी मंदिर आगमन की तैयारियों में लगी कमेटी ने इस मामले में ढील बरती। इस मामले में मंदिर प्रबंधन ने क्या कार्रवाई की किसी को नहीं बताया गया।
यह है प्रावधान
बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध समिति के 30 नवंबर 2013 के प्रस्ताव के अनुसार किसी भी गोस्वामी के द्वारा दर्शन खुलने के दौरान जगमोहन में लगे कटघरे के अंदर से दर्शनार्थियों के प्रवेश कराने पर 20 हजार रुपये प्रति व्यक्ति की दर से दंड लगाए जाने का प्राविधान है। इसके अलावा 30 अक्तूबर 2004 को सिविल जज जूनियर डिवीजन ने आदेश पारित कर मंदिर परिसर में भोजन प्रसाद खाने, खिलाने पर पूर्णता: रोक लगा रखी है।