मंदिर हाईपावर्ड कमेटी की बैठक।
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वृंदावन के श्री बांकेबिहारी मंदिर हाईपावर्ड कमेटी की आठवीं बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। मंदिर के खातों की जांच कर रही सीए की टीम को पिछले वर्षों में सिक्योरिटी एजेंसी के भुगतान में कमियां मिली हैं। अध्यक्ष ने इस मामले में प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं सीए की टीम से फाइनल रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट मिलने की जवाब-तलब किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित श्री बांकेबिहारी मंदिर हाईपावर्ड कमेटी की बैठक बृहस्पतिवार शाम को शहीद लक्ष्मण सभागार में हुई है। अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि इसमें 15 बिंदुओं पर चर्चा की गई, जिसमें से 11 बिंदुओं पर सहमति बन गई है। जो बिंदु रह गए हैं, उनको आगे के लिए होल्ड कर दिया गया है। अध्यक्ष के अनुसार, मंदिर के खातों का ऑडिट कर रही सीए की टीम ने मंदिर में सुरक्षा के लिए लगी प्राइवेट एजेंसी के भुगतान में कमियां पाई हैं। सुरक्षाकर्मियों के भुगतान में एकरूपता नहीं है।
लाखों रुपये की राशि को बढ़ाया गया है। इस पर सीए की टीम को संदेह हो रहा है। इस पर सीए और मंदिर प्रबंधक दोनों से रिपोर्ट तलब की गई है। पिछली सिक्योरिटी के भुगतान और वर्तमान एजेंसी के भुगतान का पूरा ब्योरा मांगा गया है। वहीं मंदिर में स्थायी रूप से एकाउंटेंट की नियुक्ति होगी। पूरे रिकॉर्ड और व्यय का डिजिटलाइजेशन किया जाएगा, जिससे एक क्लिक पर ब्योरा सामने आ जाएगा। अभी रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है।
साथ ही गणेश मंदिर बंद करने के मामले में उन्होंने सेवायत सदस्य दिनेश गोस्वामी से सवाल जवाब किए। कहा कि शुक्रवार को वह गणेश मंदिर का निरीक्षण करने के लिए आएंगे। मंदिर पर ताला रहेगा या नहीं, यह वहीं निर्धारित किया जाएगा। साथ भी ठाकुर जी के भोग प्रसाद को लेकर कहा कि उसके लिए वह गोस्वामियों संग बैठक करेंगे।
लाइव स्ट्रीमिंग के लिए कंपनी चयनित
मंदिर की लाइव स्ट्रीमिंग के लिए सुयोग्य मीडिया नामक कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है। यह कंपनी हर की पौड़ी, हरिद्वार में भी लाइव स्ट्रीमिंग का काम देख रही है। मंदिर के अंदर भीड़ के प्रबंधन के मुद्दे पर अध्यक्ष ने गोस्वामियों से वार्ता के बाद बेहतर व्यवस्था बनाने पर बल दिया। मंदिर प्रांगण में जो भी दुकान या किराएदार हैं, उनसे बात करके हल निकाला जाएगा। पुरानी प्रबंध कमेटी द्वारा बनवाए गए अर्धनिर्मित हॉल की जांच रिपोर्ट भी मिल चुकी है। उसका अध्ययन किया जा रहा है। कमेटी ने हॉल बनवाने में 1.95 लाख रुपये खर्च किए थे। इसकी जांच कराई गई थी। बैठक में बिहारीजी का प्राकट्योत्सव (बिहार पंचमी) धूमधाम से मनाए जाने पर भी विचार किया गया।
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