मथुरा। जिला जज राजीव भारती की अदालत ने वर्ष २०१७ में पत्नी की मौत के मामले में पति को आत्महत्या के लिए उकसाने पर सात वर्ष की कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सास और देवर को बरी कर दिया है। शादी के दो वर्ष बाद ही महिला फंदे पर लटकी मिली थी।
कोसीकलां निवासी भीमदत्त शर्मा ने २२ नवंबर २०१५ को पुत्री प्रेमलता की शादी लुहारा बाजार सौंख मगोर्रा निवासी सुमित पालीवाल से की थी। सुसरालीजनों का आरोप था कि शादी के बाद से ही ससुरालीजन दो लाख रुपये का दहेज मांग रहे थे। १३ अप्रैल २०१७ को प्रेमलता की फांसी लगने से मौत हो गई। पिता ने पति सुमित और सास ऊषा तथा देवर अमित को दहेज हत्या में नामजद किया।
पुलिस ने तीनों के खिलाफ चार्ज शीट लगाई। जिला जज राजीव भारती ने केस की सुनवाई करते हुए सास तथा देवर को बरी कर दिया। पति को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में सात साल के कारावास की सजा सुनाई तथा ३० हजार का अर्थदंड लगाया है।
डीजीसी शिवराम तरकर ने बताया कि अदालत ने सास तथा देवर को बरी कर दिया है। पति गिरफ्तारी के बाद से जेल में है। ३० हजार रुपये के अर्थदंड मेें से २० हजार रुपये वादी को दिए जाएंगे। अभियोजन की ओर से आठ गवाह परीक्षित कराए गए।