आरसीए कालेज में एक्ट ईस्ट नीति पर हुए सेमीनार में वक्ताओं ने ओजस्वी विचारों से न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की तस्वीर भी साफ की।
राका आर्या नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भोपाल से आए राका आर्या ने कहा कि लुक ईस्ट पॉलिसी और एक्ट ईस्ट पॉलिसी दोनों असल में एक ही हैं। ये भारत की विदेश नीति का एक हिस्सा हैं। हर सरकार अपनी नई नीति नहीं बनाती बल्कि वह पुरानी नीतियों में ही संशोधन कर उन्हें आगे बढ़ाती है।
पूर्व में भारत का प्रभाव पहले से रहा है। 1950 में चीन के साथ हमारे संबंध मैत्रीपूर्ण रहे लेकिन चीन की विस्तार नीति के कारण भारत ने जो मैत्री का हाथ बढ़ाया था उसे आघात पहुंचा है।
चीन ने तिब्बत पर अधिकार जमाया। इसी कारण दलाई लामा भारत में आए और राजनीतिक शरण ली। चीन पाकिस्तान से मित्रता रखता है इसलिए भारत को उससे संबंध के विषय में सोचना पड़ता है।
साउथ एशिया यूनिवर्सिटी के डा. पुष्पेंद्र कुमार (किरोड़ीमल कालेज, दिल्ली) ने कहा कि इससे हमारे राजनीतिक और व्यापारिक सबंध सुधरेंगे। उन्होंने विकास के लिए सौर ऊर्जा के इस्तेमाल पर बल दिया। मुख्य वक्ता धनंजय सिंह ने कहा कि बैंकाक और इंडोनेशिया जैसे देशों में हमारी संस्कृति है।
वहां रामायण का मंचन होता है और दीपावली राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाई जाती है। भारत के योग, महात्मा गांधी, बुद्ध यह सब विश्व के लिए प्रेरणाश्रोत रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर अरशद ने विदेश नीतियों में सुधार का सुझाव दिया।
इस अवसर पर डा. अंशु भट्ट, डा. रिचा श्रीवास्तव, उदिता रंजन, डा. संतोष सिंह, डा. प्रेम शंकर तिवारी, अंजली चतुर्वेदी, मोहिनी अग्रवाल, प्रगल्भ शर्मा, अंकुर पालीवाल, विजय कुमार आदि ने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
आभार प्राचार्या डा. प्रीति जौहरी ने व्यक्त किया। संचालन डा. भारती सागर और निमरा लोधी ने किया। इस अवसर पर प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष रामबाबू, रवि मित्तल, कौशल किशोर, ललित किशोर मित्तल, डा. अशोक जौहरी आदि उपस्थित थे।