संस्कृति समूह परिसर में ‘भावात्मक एवं अध्यात्मिक बुद्धिमत्ता का अच्छे लीडर बनने में महत्व’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया।
इसके मुख्य वक्ता के रूप में रेजेन्सिस बिजनेस स्कूल जोहानसबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) के चेयरमैन डॉ. मार्कों सर्वांजा ने 21वीं सदी में नेतृत्व के महत्व को विस्तार से समझाया।
उन्होंने कहा कि नेतृत्व किसी भी व्यापार को सही दिशा प्रदान करता है।
उन्होंने नेतृत्व के लक्षण पर आधारित अनुसंधान का उल्लेख करते हुए कहा कि निष्कर्षों से पता चला है कि तकनीकी जानकारियां नेतृत्व को सफलता की दिशा में केवल 33 प्रतिशत योगदान देती हैं, जबकि 67 प्रतिशत सफलता भावात्मक, अध्यात्मिक और अन्य रूपों पर निर्भर करती है।
उन्होंने भावनात्मक जानकारी से संबंधित चार प्रमुख समूह जैसे मान्यता, समझ का उपयोग, भावनाओं के प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया। संस्कृति समूह के चेयरमैन सचिन गुप्ता ने इस विषय को अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दा बताया। वाइस चेयरमैन राजेश गुप्ता, कार्यकारी निदेशक प्रो. पीसी छाबड़ा ने डॉ. सर्वांजा को इसके लिए धन्यवाद दिया।