थाना यमुनापार के गांव ईशापुर से तीन साल से लापता युवती की तलाश गांव में ही बोरिंग के कुए में की जा रही है। पुलिस दो दिन से कुएं और इसके आसपास खुदाई कराकर भाग्यवती को खोज रही है।
गांव ईशापुर के योगराज सिंह की पुत्री भाग्यवती 26 दिसंबर 2011 को अचानक लापता हो गई थी। इस मामले में योगराज ने पांच जनवरी 2012 को थाना यमुनापार में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। भाग्यवती के न मिलने पर 17 जनवरी को मामला गांव के ही युवक अंकुर और अतुल के खिलाफ अपहरण में तरमीम कर दिया गया।
इसकी विवेचना तत्कालीन दरोगा और इलाका इंचार्ज जगदीश सिंह ने की। उन्होंने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। जिसे योगराज ने सीओ महावन के समक्ष रखा। सीओ महावन राजेंद्र प्रसाद यादव ने फाइनल रिपोर्ट को नकारते हुए फिर से विवेचना के आदेश किए।
जून 2014 में विवेचना लक्ष्मीनगर चौकी प्रभारी नरेंद्र यादव को दी गई। नरेंद्र यादव ने मामले को आरोप पत्र की ओर ले गए और इसमें कोर्ट से कुर्की की कार्रवाई कराने की अनुमति मांगी। तभी नरेंद्र सिंह का स्थानांतरण कोटवन चौकी हो गया।
अब मामले की विवेचना लक्ष्मीनगर चौकी प्रभारी जेके शर्मा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में नौ लोगों ने शपथ पत्र देकर भाग्यवती को ईशापुर के निकट बने बोरिंग कुएं के आसपास जमीन में होना बताया है। भाग्यवती की तलाश में लक्ष्मीनगर पुलिस द्वारा कराई गई खुदाई की पूरे दिन वीडियोग्र्राफी कराई गई लेकिन खुदाई में भाग्यवती से संबंधित अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।
कोर्ट ने पूछा क्यों बरामद नहीं हुई भाग्यवती
तीन साल से भाग्यवती के बरामद न होने को लेकर युवती के पिता योगराज सिंह ने हाईकोर्ट की शरण ली। इस मामले में 17 फरवरी को दिए आदेश में यमुनापार पुलिस से पूछा गया कि भाग्यवती को पुलिस क्यों बरामद नहीं कर पाई। कोर्ट ने मामले में निष्पक्ष विवेचना करने के आदेश दिए।