- बीएसए द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर थाना हाइवे में मुकदमा
- वर्ष 2016 में तत्कालीन बीएसए मनोज कुमार मिश्रा ने भी दी थी तहरीर
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। बेसिक शिक्षा विभाग में 15 हजार शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रथम दृष्टया फर्जी पाए गए 19 शिक्षकों के खिलाफ आखिरकार थाना हाइवे में मामला दर्ज हो गया है। मुकदमा दर्ज कराने के लिए वर्ष 2016 में तत्कालीन बीएसए ने भी तहरीर दी थी। एफआईआर दर्ज होते ही विभाग और फर्जी शिक्षकों में हलचल मच गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग में वर्ष 2016 में 15 हजार शिक्षक भर्ती में तत्कालीन बीएसए मनोज कुमार मिश्रा ने थाना हाइवे में 19 शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी थी। इन शिक्षकों के प्रमाणपत्र प्रथमदृष्टया संदिग्ध पाए गए थे, लेकिन विभागीय कर्मचारी और पुलिस की संलिप्तता के कारण मुकदमा दर्ज नहीं हो सका। समय-समय पर मामला उठता रहा, बावजूद ये शिक्षक लगातार नौकरी करते रहे। न तो इनकी जांच ही की गई, न ही इन पर कोई कार्रवाई की गई और न ही इन्हें वेतन दिया गया। जबकि कई बीएसए आए और गए। निवर्तमान बीएसए वीरेंद्र कुमार सिंह व कुछ कर्मियों की मदद से 5 संदिग्ध शिक्षकों ने वेतन आदेश जारी कराने में सफलता पा ली। इस पर वित्त एवं लेखाधिकारी (एओ) कार्यालय ने आपत्ति दर्ज कराते हुए पुनर्विचार को पत्र लिखा। वेतन रुकने पर इनमें से एक शिक्षक कोर्ट पहुंच गया। उसने बीएसए के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार पत्र लिखने को एओ के अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात कहते हुए न्यायालय से वेतन दिलाने की मांग की। न्यायालय ने एओ से शपथ पत्र मांगा और आश्चर्य जताया कि कैसे यह शिक्षक विगत 8 वर्ष से लगातार नौकरी कर रहे हैं। न तो इन्हें वेतन दिया जा रहा है न ही इनकी जांच की गई। कोर्ट ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को 15 दिन में जांच करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने के लिए 27 सितंबर तक समय दिया। इसके बाद बीएसए सुनील दत्त ने उन पांच सहित 19 शिक्षकों के खिलाफ थाना हाइवे में तहरीर दी।
वित्त एवं लेखाधिकारी सजग न होते तो न खुलता मामला
पांच संदिग्ध शिक्षकों को वेतन जारी करने के बीएसए के आदेश के खिलाफ वित्त एवं लेखाधिकारी ने पुनर्विचार पत्र लिखकर सभी तथ्यों को बिंदुवार खोल दिया था। इस पर विभाग में अफरातफरी मच गई। इस पत्र के बाद ही इनमें से एक शिक्षक कोर्ट गया और न्यायालय ने इसमें आदेश जारी कर दिया।
शिक्षक को न्यायालय जाना पड़ा भारी
फर्जी शिक्षकों ने तत्कालीन बीएसए वीरेंद्र कुमार सिंह व अन्य कर्मियों की मिलीभगत से वेतन जारी कराने के आदेश तो करा लिए लेकिन वित्त एवं लेखाधिकारी ने वेतन नहीं निकाला और बीएसए को पुनर्विचार पत्र लिख दिया। सूत्रों की मानें तो एक विभागीय कर्मी ने ही संदिग्ध शिक्षक को न्यायालय जाने की सलाह दी थी। इसके बाद वह शिक्षक कोर्ट चला गया और इसमें अब मुकदमा भी दर्ज हो गया। वह शिक्षक न्यायालय नहीं जाता तो संभवत: इस मामले में कार्रवाई न होती।