तीर्थनगरी मथुरा के चौमुहां स्थित स्वर्ण मंदिर धाम में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इसमें गुरुदास सुशील वर्मा ने बताया कि महाब्रह्मर्षि कुमार स्वामी एवं शंकराचार्य के मध्य एक गलत प्रचारित शब्द को लेकर गहन मंथन हुआ। बताया कि चरित्रहीन शब्द पर पूर्ण विराम लगा दिया है। कुछ आसामाजिक तत्व सनातन धर्म एवं महाब्रह्मर्षि कुमार स्वामी को बदनाम करने की साजिश में लगे थे।
बताया कि द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती एवं काशी विद्वत परिषद के विद्वानों द्वारा चरित्रहीन शब्द का पूर्ण शास्त्रीय समाधान किया है। इससे श्रीराधा-कृष्ण, ब्रजमंडल व सनातन धर्म को गिराने का कुत्सित प्रयास असफल हुआ है। इस समय सनातन संस्कृति का जो स्वरुप हम देख रहे हैं।
वह असल में पश्चिमी सभ्यता द्वारा विकृत किया गया है। पाश्चात्य सभ्यता ग्रंथों और भारतीय संतों की गरिमा को गिराने के लिए धर्मगुरुओं और धर्मग्रंथो के वचनों में फेरबदल कर देती है। ऐसा ही एक अत्यंत चर्चित विषय चरित्रहीन शब्द का अर्थ था, जिसे हाल ही में भगवान श्री कृष्ण के रूप के साथ जोड़ा जाने लगा।
काशी विद्वत परिषद के प्रमुख व्याकरणकर्ताओं द्वारा चरित्रहीन शब्द का शास्त्रीय अर्थ निकाला गया, परमात्मा का अवतार लेना। राष्ट्रीय प्रवक्ता दिनेश कुमार गर्ग द्वारा द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती को चरित्रहीन शब्द का शास्त्रीय प्रमाण प्रदान किया गया। जिससे वे संतुष्ट और सहमत हुए हैं।
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि बहुत सी घटनाएं ऐसी हो जाती है कि मंच या व्यासपीठ से कुछ और कहा जाता है लेकिन जो प्रचारित करने वाले हैं वे टेक्नोलॉजी के माध्यम से कहीं का कहीं जोड़ के कुछ और दिखा देते हैं। दो महीने पहले की ही घटना है महाब्रह्मर्षि कुमार स्वामी विदेश गए हुए थे। वहां किसी ने उनसे भगवान श्री कृष्ण के चरित्र के बारे में प्रश्न पूछा।
उस प्रश्न को स्वामी बोल रहे थे और मीडिया पर दिखाने वालों ने उसे उत्तर के रूप में दिखा दिया। इस से स्पष्ट है कि राग-द्वेष से युक्त होकर ऐसा कार्य किया गया। शंकराचार्य, काशी विद्वत परिषद और महाब्रह्मर्षि ऐसे तीन स्तंभ हैं, जिन्होंने सनातन संस्कृति के रथ को अपने कंधों पर संभाला हुआ है। तीनों के प्रयास से श्रीकृष्ण के साथ चरित्रहीन शब्द को जोड़कर एक बार फिर सनातन को गिराने के लिए किया गया प्रयास विफल हुआ है। इसके लिए सबके ऋणी हैं।