पंचकोसीय परिक्रमा मार्ग पर वाहनों को शनिवार को संतों ने रोक दिया। शुक्रवार की रात दंडवती परिक्रमा के दौरान संतों ने अटल्ला चुंगी पर लोहे की गार्डर और पुल के पास पत्थर लगाकर ऐसा किया।
संत समाज परिक्रमा मार्ग पर वाहनों का प्रवेश रोकने के लिए काफी समय से मांग कर रहा था। अधिक मास में इस मांग ने और जोर पकड़ा लेकिन मास के दस दिन बीतने के बाद भी परिक्रमा मार्ग में बड़े वाहनों का संचालन जारी था। वृंदावन के पंचकोसीय मार्ग पर बड़े वाहनों के संचालन से परिक्रमार्थियों के साथ हादसे की आशंका रहती है। अधिक मास में जबकि परिक्रमार्थियों की संख्या बढ़ गई है तो वाहनों पर इस दौरान पूर्ण प्रतिबंध की मांग की जा रही थी।
महामंडलेश्वर नवल गिरी महाराज, ब्राह्मण सेवासंघ के अध्यक्ष चंद्रलाल शर्मा ने कहा कि दस दिन पूर्व संत और स्थानीय लोगों ने डीएम से मिलकर वृंदावन की परिक्रमा मार्ग में वाहनों के प्रवेश को रोकने की मांग की थी। लेकिन वाहन अब भी परिक्रमा मार्ग पर आ रहे थे। कई बार पुलिस के अधिकारियों को भी समस्या से अवगत कराया गया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
महंत हरिबोल महाराज और महंत फूलडोल बिहारीदास महाराज ने कहा कि वाहनों के कारण पूर्व में कई श्रद्धालुओं की मौत भी हो चुकी है, लेकिन प्रशासन ने इस ओर कोई कदम नहीं उठाया। दिन के अलावा रात को भी वाहनों का परिक्रमा मार्ग में आना जारी है। इससे दंडवती परिक्रमा देने वाले संतों और परिक्रमार्थियों को परेशानी होती है, दुर्घटना की आशंका रहती है।
एप्रोच मार्ग पर वाहनों का संचालन शुरू
कमिश्नर की ओर से वृंदावन-पानी गांव एप्रोच मार्ग को दुरुस्त करने के आदेश देने के बाद लोक निर्माण विभाग ने मार्ग पर गिट्टी और लाल मिट्टी डालकर कुछ हद तक दुुरुस्त करा दिया है। शनिवार को संतों के द्वारा परिक्रमा मार्ग में वाहनों को रोकने के बाद सभी चार पहिया वाहन एप्रोच मार्ग से होकर निकले।