जिले में राज्य पक्षी सारस की मौजूदगी संकट में है। यहां सारस की संख्या में साल दर साल कमी आ रही है। वर्तमान में यह पिछले तीन साल के न्यूनतम आंकड़े पर है।
राज्य पक्षी होने के कारण हर साल बरसात से पहले और सर्दियों में सारस की गणना की जाती है। इस बार गर्मी के मौसम में जिले से जुटाई गई सारसों की संख्या में बहुत अधिक कमी देखने को मिल रही है। वन विभाग के सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि जिले में इस वक्त सिर्फ 131 सारस मौजूद हैं।
इसमें सबसे अधिक 40 सारस छाता तहसील क्षेत्र में हैं। इसमें दो बच्चे भी शामिल हैं। बलदेव क्षेत्र में 26 और गोवर्धन में 27 सारस पाए गए हैं। इनमें 3 बच्चे भी हैं। मांट और मथुरा में सारस की संख्या क्रमश: 20 और 18 है। वन विभाग के आंकड़े बताते हैं पिछले साल की गणना में जिले में 150 सारस मिले थे, जबकि 2013 में यह संख्या 133 थी। इनके अतिरिक्त 9 बच्चे भी पाए गए।
2013 में शीतकालीन मौसम के दौरान भी 190 सारस और 44 बच्चे भी मिले थे लेकिन इस बार यह संख्या सिर्फ 131 पर ही सिमट गई है। इस घटती संख्या का कारण वन अधिकारी जिले में निरंतर कम होते जल क्षेत्र को मानते हैं।