रमणरेती मार्ग स्थित भागवत कृपा निकुंज में गुरुवार को साधु-संतों और भागवताचार्यों की बैठक हुई। इसमें सभी ने राम मंदिर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का स्वागत किया।
बैठक में भागवताचार्य कृष्णचंद्र शास्त्री ने कहा कि हजारों वर्ष पहले अयोध्या में बने राम मंदिर को राजा विक्रमादित्य ने भव्य रूप प्रदान किया था। बाद में विदेशी आक्रमणकारी बाबर ने राम मंदिर और अन्य मंदिरों को तोड़कर वहां मस्जिद बनवा डालीं।
महामंडलेश्वर स्वामी नवल गिरि ने कहा कि भगवान की जन्म स्थली पर भव्य मंदिर बनना चाहिए। यदि हमारे मुस्लिम भाई चाहें तो सरयू नदी के पार भी मस्जिद बनाई जा सकती है। महामंडलेश्वर भास्करानंद ने कहा कि हमारे मुस्लिम भाईयों को राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनवाकर भाईचारे की नई मिसाल कायम करनी चाहिए।
डा. मनोज मोहन शास्त्री ने कहा कि हिंदू धर्म में भगवान की पूजा-अर्चना नियत स्थान पर मंदिर में ही बैठकर की जाती है। इसलिए अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण परमावश्यक है। नागेंद्र गौड़ और अश्विनी मिश्र ने कहा कि राम भारत की आत्मा हैं और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रश्न है। गोपेश उपाध्याय, अशोक व्यास, अशोक शास्त्री, लक्ष्मीकांत शर्मा, विष्णु शर्मा आदि उपस्थित थे।