गिरिराजजी की परिक्रमा करते संत प्रेमानंद।
राधाकुंड। मंगलवार को संत प्रेमानंद ने ब्रजरज को मस्तक पर सजाकर परिक्रमा का क्रम पुनः आरंभ कर परिक्रमा पूर्ण की। सात कोस का परिक्रमा मार्ग राधानाम की मस्ती में झूमता नजर आया।
सुबह करीब आठ बजे जैसे ही पंचमुखी हनुमान से संत प्रेमानंत ने परिक्रमा शुरू की, परिक्रमा मार्ग पर भक्ति का सैलाब उमड़ आया। उनके आगमन का समाचार फैलते ही श्रद्धालु दूर-दूर से दौड़कर पहुंचे। मार्ग पर हर ओर फूलों की वर्षा, भजन-कीर्तन की धुन और राधे राधे की गूंज ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। संत प्रेमानंद की एक झलक पाने को भक्त व्याकुल दिखे और नजर पड़ते ही राधे राधे बोलने लगते। करीब 10:30 बजे संत राधाकुंड के कैलादेवी मंदिर पहुंचे और परिक्रमा पूर्ण की। इस दौरान परिसर राधे राधे के जयकारों से गूंज उठा।
संत प्रेमानंद करीब तीन घंटे तक तलहटी में रुके, जिससे भक्तों को उनका सान्निध्य प्राप्त हुआ। परिक्रमा को यहीं विश्राम दिया और गाड़ी से वृंदावन के लिए प्रस्थान किया। उनके जाने तक परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमंग से झूमती रही। दर्शन के लिए लोगों की काफी दूर तक लंबी लाइन लगी रही। बच्चों से लेकर बुजुर्ग महिलाएं, सभी बाबा के दर्शन करने को उत्सक दिखाई दिए। संत के अनुयायियों ने प्रसाद ग्रहण किया। जयकारों की ध्वनि तलहटी में देर तक गूंजती रही। वहीं राधा श्याम कुंड संगम पर बाबा के भक्त राधा नाम का जाप लगातार करते हुए दिखाई दिए। बाबा ने 4 किलोमीटर पैदल चलकर गिरिराज परिक्रमा पूरी की। संवाद