वृंदावन। सुदामा कुटी के शताब्दी महोत्सव और जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य की जयंती पर मंगलवार को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए गए। 11वें दिन आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि जिस संत के दर्शन मात्र से ईश्वर का स्मरण हो जाए, उसे ही सच्चा संत कहते हैं। कार्यक्रम में नाभा पीठाधीश्वर महंत सुतीक्ष्ण दास महाराज का रजत तुलादान किया गया।
तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि गुरु मां द्वारा जब भगवान कृष्ण और सुदामा जी को जंगल में लकड़ी लेने के लिए भेजा, तब भगवान श्री कृष्णा लकड़ी इकट्ठी कर रहे थे और इसी दौरान सुदामा जी ने गुरु मां द्वारा दिए चने के प्रसाद को स्वयं पा लिया था। उसी का प्रायश्चित करने के लिए सुदामा संत सुदामा दास के रूप में आए। इस दौरान बताया गया कि संत रामभद्राचार्य 30 जून 2026 से 13 जनवरी 2027 तक अज्ञातवास में रहेंगे। इस दौरान वे किसी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेंगे और न ही किसी से मुलाकात करेंगे।
वहीं महंत सांवरिया महाराज रामस्वरूप दास गुजरात ने कहा कि संत सुदामा दास महाराज ने मानवता की सेवा को ही अपने जीवन का आधार माना। महंत बलराम दास महाराज चित्रकूट, संत ऋतेश्वर महाराज और महंत सुदर्शन दास ने कहा कि प्राणी मात्र की सेवा का जज्बा ही भक्त को भगवान का आशीर्वाद प्रदान कराता है। संत विद्वत सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु और महात्माओं ने संत सुदामा दास महाराज के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला।
नाभा पीठाधीश्वर स्वामी सुतीक्ष्ण दास महाराज ने कहा कि भगवान के प्रति, माता-पिता के प्रति और देश के प्रति हमेशा वफादार रहें। संत संगोष्ठी में महंत सौम्या दास, महंत प्रेमदास, महंत गोपाल दास, महंत बृज बिहारी दास भक्तमाली, महंत बजरंगदास, संतोष दास आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन स्वामी जयराम दास देवाचार्य और महंत सुदर्शन दास ने किया। महंत अमर दास महाराज ने आभार जताया।
108 श्रीराम महायज्ञ में दी आहूति
सुदामा कुटी के पास ही कुंभ मेला क्षेत्र में चल रहे 108 श्री राम महायज्ञ में राम नाम जप के साथ आहुतियां दीं। मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं ने आचार्य विष्णुकांत शास्त्री और आचार्य मृदुलकांत शास्त्री के आचार्यत्व में चल रहे महायज्ञ में राम नाम जप के साथ आहुति दी। इस अवसर पर महंत नरोत्तम दास, महंत राघव दास, विष्णुकांत शास्त्री, महामंडलेश्वर रामस्वरूप दास, महंत कल्याण दास, स्वामी राम लखन दास, राधा मोहन दास और मोहनलाल शर्मा, भरत लाल शर्मा आदि मौजूद रहे।